Prayagraj Magh Mela fire: प्रयागराज माघ मेला में आग लगी, 20 दुकानें जलकर राख, कल्पवास सुरक्षित बाहर

प्रयागराज माघ मेला 2026 के सेक्टर-5 स्थित नारायण शुक्ला धाम शिविर में मंगलवार शाम भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। आग इतनी भयावह थी कि उसकी लपटें कई किलोमीटर दूर से देखी गईं। 20 दुकानें और कई टेंट राख हो गए, लेकिन कल्पवासियों की सुरक्षा ने बड़ी अनहोनी टाल दी।

Prayagraj Magh Mela fire

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 13, 2026

Prayagraj Magh Mela fire: प्रयागराज के माघ मेला में सेक्शन 5 के नारायण शुक्ला धाम शिविर में आग लगने से भगदड़ मच गई। आग अचानक भड़क उठी और कल्पवास कर रहे लोग डर के मारे दौड़ते हुए बाहर निकलने लगे। पुलिस और संतों ने तत्काल बचाव कार्य शुरू किया और आग को फैलने से रोकने का प्रयास किया।आग की लपटें कई किलोमीटर दूर तक दिखाई दीं। मौके पर फायर ब्रिगेड की 6 से 7 गाड़ियां पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, हालांकि नुकसान हुआ है। आग लगने का अनुमान शॉर्ट सर्किट को बताया जा रहा है।

कल्पवासियों और शिविरों को सुरक्षित निकाला गया

नारायण शुक्ला धाम शिविर में कुल 15 टेंट थे, जिनमें लगभग 50 कल्पवासी मौजूद थे। प्रशासन और पुलिस की तत्परता से सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। आग ने शिविरों के साथ-साथ बाहर लगी 20 दुकानों को भी जला दिया। दुकानों में रखा सामान पूरी तरह राख हो गया।साल 2025 के महाकुंभ के बाद माघ मेला अब साल का सबसे बड़ा मेला बनकर उभरा है। यहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु संगम तट पर स्नान करने और आस्था की डुबकी लगाने आते हैं। साधु-संतों का जमावड़ा और भक्तों की भक्ति का उत्साह माघ मेला का आकर्षण बढ़ा रहा है।

संगम तट पर भव्य धार्मिक गतिविधियां

संगम घाटों पर स्नान के साथ-साथ भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रवचन भी जारी हैं। साधु-संतों के अलावा कुछ तपस्वी भी अपनी कठोर तपस्या के लिए माघ मेला का हिस्सा बने हैं। श्रद्धालु मानते हैं कि संगम में स्नान करने से पापों का नाश होता है और मन को शांति मिलती है।माघ मेला 2026 की शुरुआत 3 जनवरी से हुई थी और यह 15 फरवरी तक चलेगा। प्रशासन ने सुरक्षा, स्वच्छता, ट्रैफिक और पार्किंग के पुख्ता इंतजाम किए हैं। ठंडी हवाओं और कोहरे के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ है।

आग के बाद प्रशासन और फायर ब्रिगेड की भूमिका

आग लगने के तुरंत बाद प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया। फायर ब्रिगेड ने आग बुझाने में सफलता पाई। कल्पवासियों की सुरक्षा के लिए त्वरित कदम उठाए गए। यह घटना प्रशासन की सतर्कता और तैयारियों की अहमियत को दर्शाती है।माघ मेला न केवल आस्था का बल्कि संस्कृति का भी प्रतीक है। यहां कल्पवास करने वाले श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठानों और तपस्या में शामिल होकर भगवान शिव की भक्ति में लीन रहते हैं। इस मेले की विशिष्टता इसकी भव्यता, भक्तों की आस्था और संगम घाटों का धार्मिक महत्व है।

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