UP News: दबाव या बीमारी? आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मौत पर सच्चाई की तलाश शुरू

शाहजहांपुर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, परिवार ने काम के दबाव और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं जबकि अधिकारी इसे बीमारी बता रहे हैं, अब जांच के बाद ही साफ होगा कि इस मामले के पीछे असली वजह क्या थी

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मौत पर सच्चाई की तलाश शुरू

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अप्रैल 3, 2026

UP News: यूपी के शाहजहांपुर में एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मौत का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच की शुरुआत कर दी है। यह मामला कथित रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े काम के दबाव से जुड़ा बताया जा रहा है। अधिकारियों के बयान के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद इस घटना ने तूल पकड़ लिया, जिसके बाद जांच के आदेस दिए गए।

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वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद

आपको बता दें कि, इस मामले ने तब गंभीर रूप लिया जब एक वीडियो सामने आया, जिसमें मृतक महिला की बेटी ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। वीडियो में बेटी अपनी मां के शव के पास बैठी नजर आ रही है और उसने दावा किया की उसकी मां पर काम का ज्यादा दबाव डाला गया था। बेटी के अनुसार, कम वेतन के बावजूद उनकी मां से लगातार ज्यादा कार्य करवाया जा रहा था, जिससे वो मानसिक तनाव में आ गई थीं।

मृतक की पहचान और परिस्थितियां

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, प्रीति शंखवार (42) नाम की महिला शहर की निवासी थीं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत थीं। उन्हें SIR से संबंधित जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। बताया गया कि उनकी तबीयत बिगड़ने लगी थी और बुधवार को इलाज के लिए लखनऊ ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गई।

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परिवार ने लगाए उत्पीड़न के आरोप

मृतक की बेटी ने आरोप लगाया कि SIR कार्य के अलावा उनकी मां से विभागीय काम भी कराया जाता था। जब उन्होंने इस संबंध में शिकायत करने की कोशिश की, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा उन्हें फटकार लगाई गई। बेटी का कहना है कि इस व्यवहार और लगातार दबाव ने उनकी मां को मानसिक रूप से तोड़ दिया था, जिससे उनकी तबीयत और बिगड़ती चली गई।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों के रवैये के कारण महिला का जीवन बेहद कष्टदायक हो गया था।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच की स्थिति

इस मामले में सिटी मजिस्ट्रेट प्रवेंद्र कुमार ने बताया कि जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, SIR से संबंधित कार्यभार पहले ही काफी हद तक कम कर दिया गया था और महिला का कोई भुगतान भी लंबित नहीं था। अधिकारियों का कहना है कि महिला पहले से ही अस्वस्थ थीं और जिला अस्पताल में भर्ती होने से पहले एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। बाद में उनकी हालत गंभीर होने पर उन्हें लखनऊ रेफर किया गया था।

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आरोपों का खंडन

जिला कार्यक्रम अधिकारी अरविंद रस्तोगी ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि न तो महिला के साथ कोई दुर्व्यवहार हुआ था और न ही उनके भुगतान से संबंधित कोई समस्या थी। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लगभग दो सप्ताह पहले ही SIR से जुड़ा कार्यभार काफी कम कर दिया गया था।