Shaheed Diwas 2026: आज पूरा भारत उन महान सपूतों को याद कर रहा है जिन्होंने अपनी मातृभूमि की आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया था। 23 मार्च का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। आज के दिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित पूरे राष्ट्र ने शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव थापर को उनकी शहादत पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
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पीएम मोदी का संदेश: ‘सामूहिक स्मृति में हमेशा अंकित रहेगा बलिदान’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार सुबह सोशल मीडिया पर एक हृदयस्पर्शी वीडियो साझा करते हुए इन तीनों क्रांतिकारियों के साहस को नमन किया। पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि भारत माता के इन वीर सपूतों का बलिदान हमारी सामूहिक स्मृति का अटूट हिस्सा है।
प्रधानमंत्री ने उनके अल्पायु में किए गए महान कार्यों पर जोर देते हुए कहा:
अदम्य साहस: इतनी कम उम्र में देश के प्रति अटूट प्रतिबद्धता और असाधारण वीरता का प्रदर्शन करना विरले ही संभव है।
निडर प्रतिरोध: औपनिवेशिक शासन की दमनकारी शक्ति भी उनके हौसलों को डिगा नहीं सकी। उन्होंने राष्ट्रहित को अपने जीवन से ऊपर रखा और बलिदान का मार्ग चुना।
पीढ़ियों के लिए प्रेरणा: प्रधानमंत्री के अनुसार, न्याय, देशभक्ति और निडरता के उनके आदर्श आज भी करोड़ों भारतीयों के भीतर राष्ट्रप्रेम की ज्वाला को प्रज्वलित करते हैं।
सीएम योगी आदित्यनाथ: ‘राष्ट्र सर्वोपरि की भावना का स्वर्णिम अध्याय’
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस अवसर पर क्रांतिकारियों को नमन किया। उन्होंने कहा कि इंकलाब की ज्योति जलाने वाले इन वीरों का त्याग भारतीय इतिहास का सबसे गौरवशाली अध्याय है। सीएम योगी ने जोर देकर कहा कि भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का समर्पण हमें ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना के साथ जीने की निरंतर प्रेरणा देता रहेगा।
इतिहास के झरोखे से: 23 मार्च 1931 की वो रात
भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु केवल नाम नहीं, बल्कि क्रांति के पर्याय हैं। साल 1928 में ब्रिटिश अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या का बदला लेने और ब्रिटिश हुकूमत की जड़ों को हिला देने वाले ‘लाहौर षड्यंत्र केस’ के आरोप में इन तीनों को फांसी की सजा सुनाई गई थी।
23 मार्च, 1931 की शाम लाहौर जेल में इन तीनों वीरों को तय समय से पहले ही फांसी दे दी गई। मौत के सामने भी उनके चेहरों पर शिकन नहीं थी, बल्कि वे “इंकलाब जिंदाबाद” के नारों के साथ आगे बढ़े। यही कारण है कि उनकी शहादत की याद में हर साल 23 मार्च को ‘शहीद दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
राष्ट्र के युवाओं के लिए संदेश
आज का यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारी आजादी कितनी महंगी है। यह उन वीरों के रक्त से सिंची गई है जिन्होंने अपने भविष्य की चिंता किए बिना देश के वर्तमान को सुरक्षित किया। आज पूरा देश मौन रखकर और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से इन हुतात्माओं को अपनी कृतज्ञता प्रकट कर रहा है।
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