जज पद पर प्रमोशन के लिए 7 साल का अनुभव जरूरी

बिलासपुर. विधि एवं विधायी विभाग ने हायर ज्यूडिशियल सर्विस रूल्स में बड़ा बदलाव करते हुए न्यायिक अधिकारियों की पदोन्नति और आरक्षण व्यवस्था में जरूरी संशोधन किए हैं। इस संबंध में हायर ज्यूडिशियल सर्विस (भर्ती तथा सेवा शर्तें) नियम, 2006 में बदलाव की अधिसूचना जारी कर दी गई है। विधि विभाग की ओर से जारी अधिसूचना हाई कोर्ट की अनुशंसा के बाद लागू की गई है। नए नियमों के तहत ज्यूडिशियल सर्विस में पदोन्नति के मानदंडों को पहले की तुलना में अधिक सख्त किया गया है। संशोधित नियमों के अनुसार अब सिविल जज (जूनियर और सीनियर कैटेगरी) को पदोन्नति के लिए कम से

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Published On :

जनवरी 29, 2026

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बिलासपुर.

विधि एवं विधायी विभाग ने हायर ज्यूडिशियल सर्विस रूल्स में बड़ा बदलाव करते हुए न्यायिक अधिकारियों की पदोन्नति और आरक्षण व्यवस्था में जरूरी संशोधन किए हैं। इस संबंध में हायर ज्यूडिशियल सर्विस (भर्ती तथा सेवा शर्तें) नियम, 2006 में बदलाव की अधिसूचना जारी कर दी गई है। विधि विभाग की ओर से जारी अधिसूचना हाई कोर्ट की अनुशंसा के बाद लागू की गई है।

नए नियमों के तहत ज्यूडिशियल सर्विस में पदोन्नति के मानदंडों को पहले की तुलना में अधिक सख्त किया गया है। संशोधित नियमों के अनुसार अब सिविल जज (जूनियर और सीनियर कैटेगरी) को पदोन्नति के लिए कम से कम सात वर्ष की सेवा पूरी करना अनिवार्य होगा। वहीं, पद पर बने रहने की न्यूनतम समय-सीमा को पांच वर्ष से घटाकर तीन वर्ष कर दिया गया है।

हायर ज्यूडिशियल सर्विस में भर्ती कोटा के नियमों में भी बदलाव किया गया है। पहले जहां 65 प्रतिशत और 10 प्रतिशत का प्रावधान था, उसे संशोधित कर क्रमशः 50 प्रतिशत और 25 प्रतिशत कर दिया गया है। नए नियमों के तहत दिव्यांगों के लिए चार प्रतिशत पद आरक्षित किए गए हैं। इसमें दृष्टिबाधित और अल्प दृष्टि के लिए एक प्रतिशत, श्रवण बाधित (बधिर को छोड़कर) के लिए एक प्रतिशत तथा चलने में निशक्तता, कुष्ठ रोग मुक्त, बौनापन, तेजाब हमला पीड़ित और मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के लिए एक प्रतिशत आरक्षण तय किया गया है।

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