Sevashray Health Camp Case : तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी एक बार फिर कानूनी विवादों के घेरे में आ गए हैं। उनके संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर में आयोजित किए गए फ्लैगशिप मेडिकल और हेल्थ चेक-अप कैंप, जिसे ‘सेवाश्रय’ (Sebashroy) के नाम से जाना जाता है, को लेकर पुलिस में एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई गई है। इस एफआईआर ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। अभिषेक बनर्जी और उनके सहयोगियों पर आम नागरिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह मामला तब सामने आया जब स्थानीय स्तर पर इस स्वास्थ्य शिविर के संचालन और इसकी कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए गए, जिसके बाद कानूनी कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त हुआ।
बिना वैध अनुमति के अनधिकृत मेडिकल सेटअप चलाने का आरोप
शिकायतकर्ता द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। शिकायत में मुख्य रूप से यह दावा किया गया है कि अभिषेक बनर्जी द्वारा संचालित ‘सेवाश्रय’ कैंप विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग तारीखों और समय पर आयोजित किए जाते रहे हैं, लेकिन इनका संचालन करने के लिए आवश्यक वैध रजिस्ट्रेशन या प्रशासनिक अनुमति नहीं ली गई थी। आरोप है कि यह कैंप एक अनधिकृत मेडिकल और डायग्नोस्टिक सेटअप की तरह काम कर रहा था, जो कि स्वास्थ्य विभाग के नियमों और मापदंडों का सीधा उल्लंघन है। बिना किसी लाइसेंस या सरकारी पंजीकरण के मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण करना न केवल कानूनन जुर्म है, बल्कि यह उन हजारों लोगों की जान को खतरे में डालने जैसा है, जो इन कैंपों में स्वास्थ्य लाभ के लिए पहुंचते हैं।
सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा और नियमों की अनदेखी पर विवाद
इस एफआईआर ने स्वास्थ्य सेवाओं के निजी और राजनीतिक आयोजन पर बड़े प्रश्न खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता का तर्क है कि मेडिकल शिविर जैसे संवेदनशील आयोजन के लिए कड़ी निगरानी और प्रशिक्षित चिकित्सा स्टाफ का होना अनिवार्य है। यदि कोई कैंप बिना पंजीकरण के चलता है, तो वहां न तो डॉक्टरों की योग्यता की पुष्टि होती है और न ही उपकरणों की गुणवत्ता की। ऐसे में डायग्नोस्टिक सेटअप का उपयोग आम जनता के साथ एक बड़ा धोखा हो सकता है। यह मामला अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन चुका है, जहां विपक्ष इसे अभिषेक बनर्जी की प्रशासनिक लापरवाही और सत्ता के दुरुपयोग के रूप में देख रहा है। पुलिस अब इस मामले की गहन जांच करने की तैयारी में है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अनधिकृत सेटअप के पीछे किसका हाथ था और इसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है।
कानून के दायरे में अभिषेक बनर्जी का स्वास्थ्य शिविर अभियान
अभिषेक बनर्जी के लिए ‘सेवाश्रय’ कैंप उनके संसदीय क्षेत्र में जनसंपर्क का एक बड़ा माध्यम रहा है, लेकिन अब यह कानूनी मोड़ उनकी छवि के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। यदि जांच में अनधिकृत संचालन की पुष्टि होती है, तो उनके और उनके सहयोगियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है। वर्तमान में पुलिस शिकायत की बारीकियों को खंगाल रही है और उन सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है जो इन कैंपों के आयोजन से जुड़े हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी अब इस बात की जांच करेंगे कि क्या वाकई में इन कैंपों में मेडिकल मानकों का पालन किया जा रहा था या फिर यह केवल एक अनियंत्रित स्वास्थ्य सेवा का जाल था। आने वाले दिनों में यह मामला अदालत और पुलिसिया जांच के बीच नया राजनीतिक मोड़ ले सकता है।
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