Stock Market Crash: 14 लाख करोड़ गायब! आखिर क्यों मिडिल-ईस्ट की आग ने झुलसाया भारतीय शेयर बाजार?

दलाल स्ट्रीट पर आज 'ब्लैक मंडे' जैसा नजारा रहा। मिडिल-ईस्ट में ईरान-अमेरिका युद्ध गहराने और ट्रंप के 48 घंटे के अल्टीमेटम से सेंसेक्स 1837 अंक फिसल गया। कच्चे तेल के $113 पार जाने और रुपये के 94 के पार टूटने से निवेशकों ने मिनटों में 14 लाख करोड़ रुपये गंवा दिए। क्या बाजार और गिरेगा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 23, 2026

Stock Market Crash: हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के लिए ‘ब्लैक मंडे’ जैसी स्थिति रही। मिडिल-ईस्ट (पश्चिम एशिया) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के चलते घरेलू बाजार ताश के पत्तों की तरह ढह गया। सोमवार, 23 मार्च 2026 को बाजार खुलते ही बिकवाली का भारी दबाव देखा गया, जो दिन चढ़ने के साथ और गहराता गया। बाजार बंद होने तक सेंसेक्स 1836.57 अंकों (2.46%) की भारी गिरावट के साथ 72,696.39 के स्तर पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 इंडेक्स भी 601.85 अंकों (2.60%) की बड़ी गिरावट दर्ज करते हुए 22,512.65 पर बंद हुआ।

निवेशकों को भारी चपत: एक दिन में स्वाहा हुए 14 लाख करोड़ रुपये

बाजार में आई इस सुनामी ने निवेशकों की गाढ़ी कमाई पर जोरदार प्रहार किया है। सोमवार की इस भीषण गिरावट की वजह से बीएसई (BSE) में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन तेजी से नीचे गिरा, जिससे निवेशकों को करीब 14 लाख करोड़ रुपये का घाटा हुआ। बाजार के जानकारों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा की जा रही बिकवाली ने आग में घी डालने का काम किया है। बाजार की इस अस्थिरता ने छोटे और बड़े दोनों तरह के निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

निफ्टी और सेंसेक्स के अधिकांश स्टॉक्स लाल निशान में

बाजार में चौतरफा बिकवाली का आलम यह था कि निफ्टी 50 की 50 में से 47 कंपनियां गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुईं। केवल 3 कंपनियों के शेयर ही किसी तरह हरे निशान में टिक पाए। सेंसेक्स का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा, जहाँ 30 प्रमुख कंपनियों में से महज 4 स्टॉक्स बढ़त बनाने में कामयाब रहे, जबकि बाकी 26 कंपनियों के शेयर धराशायी हो गए। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि बाजार में किसी खास सेक्टर के बजाय पूरी इकोनॉमी से जुड़े शेयरों में कमजोरी देखी गई।

टाइटन और ट्रेंट जैसे दिग्गजों में भारी गिरावट

दिग्गज कंपनियों के शेयरों की बात करें तो टाटा ग्रुप की कंपनी टाइटन को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा, जिसका शेयर 6.24% टूट गया। इसके अलावा, रिटेल सेक्टर की बड़ी कंपनी ट्रेंट के शेयरों में भी 5.90% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सीमेंट सेक्टर की दिग्गज अल्ट्राटेक सीमेंट का शेयर भी 5.40% नीचे गिरा। बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की कंपनियों जैसे एचडीएफसी बैंक (4.70%), अडाणी पोर्ट्स (4.49%), और महिंद्रा एंड महिंद्रा (3.55%) में भी जबरदस्त बिकवाली देखी गई।

आईटी शेयरों ने दिया मामूली सहारा: एचसीएल टेक टॉप गेनर

इतनी बड़ी गिरावट के बीच सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेक्टर की कुछ कंपनियों ने बाजार को थोड़ा संभालने की कोशिश की। सेंसेक्स की कंपनियों में एचसीएल टेक (HCL Tech) का शेयर 1.83% की बढ़त के साथ टॉप गेनर रहा। इसके अलावा पावर ग्रिड (1.39%), इन्फोसिस (0.28%), और टेक महिंद्रा (0.19%) भी मामूली तेजी के साथ बंद होने में सफल रहे। हालांकि, इन शेयरों की बढ़त इंडेक्स की भारी गिरावट को रोकने के लिए ऊंट के मुंह में जीरे के समान साबित हुई।

अन्य प्रमुख शेयरों का प्रदर्शन और बाजार की दिशा

बाजार के अन्य बड़े नामों में टाटा स्टील (4.80%), एसबीआई (2.52%), और रिलायंस इंडस्ट्रीज (0.52%) की गिरावट ने भी सूचकांक पर दबाव बनाए रखा। रिलायंस और टीसीएस जैसे हैवीवेट शेयरों में गिरावट कम रही, लेकिन बाजार के ओवरऑल सेंटिमेंट को सुधारने में ये नाकाम रहे। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मिडिल-ईस्ट के हालातों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। फिलहाल, विशेषज्ञ निवेशकों को संभलकर चलने और ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनाने की सलाह दे रहे हैं।

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