‘सीनियर नेताओं को किया जा रहा इग्नोर’… पंजाब कांग्रेस में रंधावा का बड़ा हमला, हाईकमान पर साधा निशाना

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों और 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर शुरू हुआ विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मौजूदा हालात पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर तीन-चार दौर की बैठकों के बावजूद पार्टी में डैमेज कंट्रोल क्यों नहीं हो पा रहा है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। रंधावा ने कहा कि कांग्रेस के पास अनुभवी और वरिष्ठ नेताओं की कोई कमी नहीं है, इसके बावजूद पार्टी के भीतर लगातार बढ़ रहे मतभेद चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि देश के लोग आज भी

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Published On :

जुलाई 4, 2026

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चंडीगढ़
 पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों और 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर शुरू हुआ विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मौजूदा हालात पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर तीन-चार दौर की बैठकों के बावजूद पार्टी में डैमेज कंट्रोल क्यों नहीं हो पा रहा है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

रंधावा ने कहा कि कांग्रेस के पास अनुभवी और वरिष्ठ नेताओं की कोई कमी नहीं है, इसके बावजूद पार्टी के भीतर लगातार बढ़ रहे मतभेद चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि देश के लोग आज भी इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के दौर की कांग्रेस को पसंद करते हैं, इसलिए पार्टी नेतृत्व को मौजूदा हालात पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

दरअसल, विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत कांग्रेस हाईकमान ने ऑब्जर्वर टीम गठित की थी। इसके बाद दिल्ली में दो से तीन दौर की बैठकों में पंजाब के लगभग सभी वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक लिया गया।

चन्नी के करीबी सोर्स के मुताबिक नेता ने भरोसा दिलाया कि राहुल गांधी 7 जुलाई को विदेश से लौट आएंगे, उसके बाद चन्नी की उनसे मीटिंग करा दी जाएगी। दूसरी तरफ कल शुक्रवार को दिल्ली में अमित शाह से मिलकर आए गुरदासपुर सांसद सुखजिंदर रंधावा ने हाईकमान पर ही सवाल खड़े किए।

एक इंटरव्यू में रंधावा ने कहा- लीडरशिप को देखना चाहिए कि ऐसी बातें क्यों हो रही हैं। इतने पदाधिकारियों के बावजूद डैमेज कंट्रोल क्यों नहीं हो रहा। 3-4 मीटिंग के बाद भी ऐसा होना, यह किसका फेलियर है। इंदिरा गांधी-राजीव गांधी के वक्त 3 जनरल सेक्रेटरी होते थे, अब पता नहीं कितने हैं। सीनियर कांग्रेसियों को नजरअंदाज किया जाता है, इसलिए ऐसी बातें होती हैं।

वहीं पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल भी इसको लेकर हरकत में आ गए हैं। वह आज या फिर अगले कुछ ही दिनों में चंडीगढ़ पहुंचकर मौजूदा प्रधान सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व CM सांसद चरणजीत चन्नी से मुलाकात कर सकते हैं।

वहीं शुक्रवार को सांसद अमरिंदर राजा वड़िंग को प्रधान बनाए रखने पर पूर्व CM चरणजीत चन्नी ने कांग्रेस हाईकमान को तीखे तेवर दिखाए। शुक्रवार को अपने घर मोरिंडा में 50 से ज्यादा नेता इकट्‌ठे कर हाईकमान का फैसला रिजेक्ट कर दिया।

चन्नी गुट ने कहा कि एक हफ्ते के बाद वह हाईकमान से मुलाकात करेंगे और अपना विरोध दर्ज कराएंगे। चन्नी इस वक्त ठीक उसी स्टाइल में पार्टी हाईकमान पर प्रेशर बना रहे हैं, जैसे नवजोत सिद्धू ने प्रधान रहते 2021 में कैप्टन अमरिंदर सिंह को CM की कुर्सी से हटवा दिया था। हालांकि उसके बाद सिद्धू की जगह चन्नी सीएम बन गए।

पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि चन्नी के इस स्टैप से कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी सड़क पर आ गई है। अब वह हाईकमान पर प्रेशर बनाने में कामयाब होते हैं या नहीं, लेकिन इसका खामियाजा कांग्रेस को विधानसभा चुनाव 2027 में झेलना ही पड़ेगा।

इसे देखते हुए कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल भी आज चंडीगढ़ आ सकते हैं। 3 पॉलिटिकल एक्सपर्ट से जानिए, चन्नी के फैसले से कांग्रेस को क्या फायदा और नुकसान होगा…

राजा वड़िंग को लेकर बहस तेज
इसके बावजूद प्रदेश इकाई में असंतोष कम होने के बजाय और खुलकर सामने आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक संगठनात्मक फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व को लेकर भी बहस तेज हो गई है।

पार्टी के भीतर यह चर्चा भी है कि पंजाब कांग्रेस में मौजूदा स्थिति पहले सामने आए कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के टकराव जैसी बनती जा रही है। अब चन्नी और वड़िंग समर्थकों के बीच बढ़ती खींचतान ने हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है।
हालांकि कांग्रेस के भीतर यह भी माना जा रहा है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में अब तक लिए गए बड़े संगठनात्मक फैसलों को वापस लेने की परंपरा नहीं रही है। ऐसे में हाल ही में घोषित संगठनात्मक सूची में बड़े बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि इस स्तर पर बदलाव करने से विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

सात जुलाई को विदेश दौरे पर लौटेंगे राहुल गांधी
सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी 7 जुलाई को विदेश दौरे से लौटने के बाद पंजाब कांग्रेस के हालात की समीक्षा कर सकते हैं। इसके साथ ही संभावना जताई जा रही है कि कांग्रेस हाईकमान कुछ वरिष्ठ नेताओं को चंडीगढ़ भेज सकता है। प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल और सह-प्रभारियों की चन्नी तथा वड़िंग गुट के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठक कर संगठन में बढ़ते विवाद को शांत करने और डैमेज कंट्रोल की कोशिश की जा सकती है। पंजाब मामलों के सह प्रभारी सूरज ठाकुर चरणजीत चन्नी से मुलाकात के लिए चंडीगढ़ आ सकते हैं।

 

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