यूजर प्राइवेसी पर SC का आदेश, व्हॉट्सऐप को मेटा से डेटा साझा न करने की हिदायत

 नई दिल्ली व्हाट्सएप और मेटा की प्राइवेसी पॉलिसी मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है. कोर्ट ने साफ किया कि डेटा शेयरिंग की ये प्रक्रिया भारतीय यूजर्स के निजता के अधिकार के खिलाफ है.  हालांकि, सीसीआई के वकील ने एनसीएलएटी (NCLAT) के कुछ निष्कर्षों पर आपत्ति जताई है. सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने व्हाट्सएप को निर्देश देते हुए कहा, 'हम आपको मेटा के साथ एक भी जानकारी साझा करने की अनुमति नहीं देंगे. हम आपको इस देश की नीतियों की गोपनीयता के साथ खेलने की इजाजत कतई नहीं देंगे.'  इस पूरे प्रकरण में कोर्ट

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Published On :

फ़रवरी 3, 2026

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 नई दिल्ली

व्हाट्सएप और मेटा की प्राइवेसी पॉलिसी मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है. कोर्ट ने साफ किया कि डेटा शेयरिंग की ये प्रक्रिया भारतीय यूजर्स के निजता के अधिकार के खिलाफ है.  हालांकि, सीसीआई के वकील ने एनसीएलएटी (NCLAT) के कुछ निष्कर्षों पर आपत्ति जताई है.

सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने व्हाट्सएप को निर्देश देते हुए कहा, 'हम आपको मेटा के साथ एक भी जानकारी साझा करने की अनुमति नहीं देंगे. हम आपको इस देश की नीतियों की गोपनीयता के साथ खेलने की इजाजत कतई नहीं देंगे.' 

इस पूरे प्रकरण में कोर्ट के सामने तीन मुख्य अपीलें थीं, जो मेटा, व्हाट्सएप और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की ओर से दायर की गई थीं. सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने इन अपीलों का पक्ष रखा. सुनवाई के दौरान मेटा के वकील ने दलील दी कि कोर्ट के आदेश के मुताबिक 213 करोड़ रुपये के जुर्माने का भुगतान पहले ही किया जा चुका है.

मेटा की नई प्राइवेसी पॉलिसी पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप और मेटा की नई प्राइवेसी पॉलिसी पर सुनवाई करते हुए बेहद कड़े सवाल उठाए और कंपनी को डेटा साझा करने से साफ मना कर दिया. CJI ने व्हाट्सएप की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि आपने इसे इतनी चालाकी से तैयार किया है कि इसे समझना नामुमकिन है. उन्होंने पूछा कि क्या देश का आम आदमी, जैसे घर में काम करने वाले नौकर, निर्माण मजदूर या छोटे विक्रेता, इस जटिल नीति को समझ पाएंगे?

कोर्ट ने साफ कहा कि उपभोक्ताओं को इस ऐप की 'लत' लगा दी गई है और अब उनकी मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है.

यूजर्स के डेटा का गलत इस्तेमाल हो रहा- SC

सीजेआई ने कहा कि लोगों के डेटा का इस्तेमाल व्यावसायिक लाभ के लिए किया जा रहा है और अब तक लाखों यूजर्स के डेटा का गलत इस्तेमाल हो चुका है. इस दौरान मेटा के वकील अखिल सिबल ने दलील दी कि व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए सीमित डेटा शेयरिंग की अनुमति है.

इस पर सीजेआई ने कहा, 'अगर आपको डेटा का कोई हिस्सा बेचने लायक लगेगा, तो आप उसे बेच देंगे! सिर्फ इसलिए कि भारतीय उपभोक्ता मूक हैं और उनके पास आवाज नहीं है, आप उन्हें शिकार नहीं बना सकते.'

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कहा कि व्हाट्सएप यूजर्स को सिर्फ दो ही विकल्प दे रहा है- 'या तो पॉलिसी स्वीकार करो या ऐप का इस्तेमाल बंद कर दो.' इस पर अदालत ने कहा कि बिहार के दूरदराज इलाकों या तमिलनाडु के गांवों में रहने वाले लोग, जिन्हें अंग्रेजी नहीं आती, वे इस नीति के खतरनाक परिणामों को कभी नहीं समझ पाएंगे.

डेटा शेयर करने की इजाजत से SC का साफ इनकार

सीजेआई ने साफ शब्दों में कहा, 'जब तक आप हमें यह विश्वास नहीं दिला देते कि आपको ऐसा करने का कोई दैवीय अधिकार हासिल है, तब तक हम आपको डेटा शेयर करने की अनुमति नहीं देंगे.'

 3 जजों की बेंच के सामने होगी अपीलों पर सुनवाई

व्हाट्सएप के वकील ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनकी नीतियां दूसरे अंतरराष्ट्रीय क्षेत्राधिकारों के स्टैंडर्ड्स के मुताबिक ही हैं. लेकिन इन दलीलों को सुनने को बाद सीजेआई ने बताया कि एनसीएलएटी के सामने जनवरी 2025 के आदेश की स्थिति अभी भी अहम है. मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अब सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है. अब इन अपीलों पर विस्तृत सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की बेंच के सामने होगी.

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