यूके में गर्मी का कहर: 2 महीनों में 2700 लोगों की मौत, हीटवेव ने तोड़े रिकॉर्ड, बढ़ा खतरा

लंदन  एक समय था जब यूरोप, खासकर ब्रिटेन और उत्तरी यूरोप में, घरों में एयर कंडीशनर लगवाना बेवजह की फिजूलखर्ची माना जाता था. वहां की ठंडी जलवायु में इसकी जरूरत ही महसूस नहीं होती थी. लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. यूरोप ऐसी गर्मी झेल रहा है कि एयर कंडीशनर अब आराम की चीज नहीं, बल्कि सुरक्षा का साधन बनता जा रहा है. इनकी डिमांड बढ़ गई है. लेकिन साथ ही ताबूतों की भी डिमांड में उछाल आया है. हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सिर्फ मई और जून की हीटवेव में इंग्लैंड और

Wrriten By :

Editor

Published On :

जुलाई 13, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

लंदन 

एक समय था जब यूरोप, खासकर ब्रिटेन और उत्तरी यूरोप में, घरों में एयर कंडीशनर लगवाना बेवजह की फिजूलखर्ची माना जाता था. वहां की ठंडी जलवायु में इसकी जरूरत ही महसूस नहीं होती थी. लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. यूरोप ऐसी गर्मी झेल रहा है कि एयर कंडीशनर अब आराम की चीज नहीं, बल्कि सुरक्षा का साधन बनता जा रहा है. इनकी डिमांड बढ़ गई है. लेकिन साथ ही ताबूतों की भी डिमांड में उछाल आया है. हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सिर्फ मई और जून की हीटवेव में इंग्लैंड और वेल्स में कम से कम 2,700 लोगों की मौत का अनुमान लगाया गया है. वहीं एक्सपर्ट्स का मानना है कि असली चुनौती अभी आनी बाकी है। 

इम्पीरियल कॉलेज लंदन, ब्रिटेन के मौसम विभाग (Met Office) और लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने मौतों का अनुमान लगाया है. सोमवार को आई स्टडी के मुताबिक मई की हीटवेव में करीब 550 और जून के अंत तक आई दूसरी लहर में लगभग 2,200 लोगों की जान गई. मई और जून में तापमान ने सभी रिकॉर्ड तोड़े हैं। 

सऊदी जैसी गर्मी झेलने की तैयारी
यूरोप के देशों ने इस साल की गर्मी से यह समझ लिया है कि उनका इन्फ्रास्ट्रक्चर इसके लिए तैयार नहीं है. यही कारण है कि वह अब सऊदी जैसी गर्मी की तैयारी कर रहे हैं. CNN की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे बड़ा संकेत यूरोप की मेन हाई-स्पीड रेल कंपनी यूरोस्टार से मिला है. लंदन, पेरिस और ब्रसेल्स को जोड़ने वाली इस कंपनी ने अपनी नई ट्रेनों के डिजाइन में बड़ा बदलाव किया है. पहले जिन ट्रेनों को 45 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी झेलने के लिए बनाया जाना था, अब उन्हें 55 डिग्री सेल्सियस तक काम करने लायक बनाया जा रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि गर्मी के कारण उसकी ट्रेनें 2026 में लगातार रुकती रही है। 

इससे पहले इन ट्रेनों में ऐसे एयर कंडीशनिंग सिस्टम लगाए जाएंगे, जो 55 डिग्री तक भी काम करते रहें. ये ट्रेनें 2031 से सेवा में आएंगी और 2060 के दशक तक चलेंगी. यानी कंपनी मानकर चल रही है कि आने वाले वर्षों में उत्तरी यूरोप का मौसम आज के मुकाबले कहीं ज्यादा गर्म होगा. यूरोस्टार की मुख्य कार्यकारी अधिकारी ग्वेंडोलिन काजेनाव ने कहा कि कंपनी भविष्य में ऐसे तापमान के लिए तैयारी कर रही है, जो आज सऊदी अरब जैसे देशों में देखने को मिलता है। 

दो हीटवेव से हजारों मौतें
नई स्टडी के मुताबिक, 21 से 29 मई के बीच आई पहली हीटवेव में करीब 550 लोगों की मौत हुई, जबकि 18 से 28 जून के बीच दूसरी और अधिक गर्मी ने लगभग 2,200 लोगों की जान ले ली. इस तरह सिर्फ दो महीनों में अनुमानित मृतकों की संख्या 2,700 तक पहुंच गई. इसी दौरान इंग्लैंड में मई में 35.1 डिग्री सेल्सियस और जून में 37.7 डिग्री सेल्सियस का रिकॉर्ड तापमान दर्ज किया गया, जो सामान्य से काफी ज्यादा था। 

2050 के लिए क्या मिल रही चेतावनी?
ब्रिटेन की क्लाइमेट चेंज कमेटी (CCC) पहले ही चेतावनी दे चुकी है कि देश जलवायु परिवर्तन के असर से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है. मई की रिपोर्ट में समिति ने अनुमान लगाया था कि 2050 तक ब्रिटेन के 92 प्रतिशत घर जरूरत से ज्यादा गर्म हो सकते हैं. समिति ने सरकार को सलाह दी है कि दफ्तरों के लिए अधिकतम तापमान सीमा तय की जाए और अस्पतालों, स्कूलों समेत सार्वजनिक इमारतों में एयर कंडीशनिंग की सुविधाओं में पैसा लगाया जाए। 

2