SC West Bengal SIR: मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन निरीक्षण (SIR) को लेकर अहम निर्देश जारी किए। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस प्रक्रिया को समय पर पूरा करने के लिए सिविल जजों की भी तैनाती की जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि इसके बावजूद न्यायिक अधिकारियों की कमी बनी रहती है, तो पड़ोसी राज्यों से मदद ली जाए। यह निर्देश उस समय आया जब कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने लंबित कार्य और सीमित समय को देखते हुए पर्याप्त अधिकारियों की उपलब्धता पर चिंता जताई।
हाईकोर्ट ने बताई अधिकारियों की कमी
सुप्रीम कोर्ट के पहले आदेश के अनुपालन में सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें कहा गया कि SIR की तय समयसीमा के अनुसार उपलब्ध न्यायिक अधिकारियों की संख्या अपर्याप्त है। इससे पहले, अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच मतभेद सामने आए थे। इसी विवाद को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति का जिम्मा सौंपा था।
50 लाख दावों की जांच, समय बेहद कम
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचौल की पीठ ने मामले की गंभीरता को रेखांकित किया। अदालत ने बताया कि करीब 50 लाख दावों और आपत्तियों की जांच होनी है। यदि 250 जिला जज और अतिरिक्त जिला जज नियुक्त किए जाएं और प्रत्येक अधिकारी प्रतिदिन 250 मामलों का निपटारा करे, तब भी पूरी प्रक्रिया में लगभग 80 दिन लग सकते हैं। ऐसे में 28 फरवरी को अंतिम सूची जारी करने की समयसीमा चुनौतीपूर्ण नजर आती है।
सिविल जजों और पड़ोसी राज्यों से मदद का निर्देश
कोर्ट ने अपने आदेश में जोड़ा कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तीन वर्ष से अधिक अनुभव वाले सिविल जजों को भी इस कार्य में शामिल करें। यदि इसके बाद भी कमी बनी रहती है, तो झारखंड और ओडिशा के मुख्य न्यायाधीशों से संपर्क कर वहां से न्यायिक अधिकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया जाए। इन अधिकारियों के आवागमन और ठहरने का पूरा खर्च चुनाव आयोग वहन करेगा।
अंतिम सूची और सप्लीमेंट्री लिस्ट पर स्पष्टता
बंगाल में SIR के तहत अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की जानी है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग बाद में सप्लीमेंट्री सूची जारी कर सकता है। जो नाम सप्लीमेंट्री सूची में शामिल होंगे, उन्हें भी अंतिम सूची का हिस्सा माना जाएगा। इससे उन मतदाताओं को राहत मिल सकती है जिनके दावे या आपत्तियां समय पर निपट नहीं पातीं।
राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच विवाद
इस मामले में राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच कई मुद्दों पर टकराव देखने को मिला है। चुनाव आयोग का कहना है कि राज्य सरकार ने क्लास-2 अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की, जिसके कारण अन्य राज्यों से माइक्रो ऑब्जर्वर बुलाने पड़े। वहीं, राज्य सरकार का आरोप है कि आयोग ने ‘स्पेशल रोल ऑफिसर’ नामक नए पद सृजित कर दिए हैं, जो इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) से भी ऊपर बताए जा रहे हैं।
पिछली सुनवाई में दिए गए निर्देश
9 फरवरी की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को क्लास-2 अधिकारी उपलब्ध कराने का आदेश दिया था। लेकिन 20 फरवरी को चुनाव आयोग ने अदालत को सूचित किया कि अब तक अधिकारी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। दोनों पक्षों के बीच जारी इस मतभेद को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने SIR की पूरी प्रक्रिया न्यायिक अधिकारियों से संपन्न कराने का निर्देश दिया। अब इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान अदालत स्थिति की समीक्षा करेगी।









