SC Relief to Samay Raina: समय रैना की बड़ी जीत! सुप्रीम कोर्ट ने India’s Got Latent से जुड़ी FIR की रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ विवाद में समय रैना, रणवीर इलाहाबादिया और अन्य कलाकारों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले रद्द कर दिए हैं।

SC Relief to Samay Raina

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 14, 2026

SC Relief to Samay Raina: देश के जाने-माने और लोकप्रिय स्टैंडअप कॉमेडियन समय रैना तथा मशहूर यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया को देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी कानूनी राहत मिली है। उनके चर्चित और विवादित यूट्यूब शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ (India’s Got Latent) के एक एपिसोड के दौरान की गई असंवेदनशील और आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज की गई सभी आपराधिक शिकायतों और एफआईआर (FIR) को सुप्रीम कोर्ट ने औपचारिक रूप से रद्द कर दिया है। हालांकि, अदालत ने इस मामले में नरमी बरतने के साथ-साथ कड़ी टिप्पणी करते हुए सभी संबंधित पक्षों पर 3-3 लाख रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है।

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क्या था पूरा विवाद और कैसे बढ़ा मामला?

इस पूरे कानूनी विवाद की शुरुआत कॉमेडियन समय रैना के लोकप्रिय यूट्यूब शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के एक विशेष एपिसोड से हुई थी। उस शो में पैनलिस्ट के रूप में शामिल हुए यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया द्वारा कुछ ऐसी टिप्पणियां की गईं, जिन्हें लेकर सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश फैल गया था। दिव्यांगजनों और समाज के अन्य संवेदनशील विषयों को लेकर की गई इन बातों को तमाम दर्शकों और संगठनों ने बेहद अश्लील, अपमानजनक और आपत्तिजनक करार दिया था।

परिणामस्वरूप, देश के अलग-अलग राज्यों में दोनों सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के खिलाफ पुलिस में शिकायतें दर्ज कराई गईं और कई स्थानों पर एफआईआर दर्ज कर ली गई थी। इस कानूनी शिकंजे से बचने और अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगवाने के लिए समय रैना और रणवीर इलाहाबादिया ने सीधे देश के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) का दरवाजा खटखटाया था।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और निर्देश

मामلات की सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने शो के दौरान दिए गए उन विवादित बयानों पर अपनी गहरी नाराजगी और असंतोष व्यक्त किया था। अदालत ने सुनवाई के दौरान बहुत ही स्पष्ट शब्दों में यह टिप्पणी की थी कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद के तहत दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech) का अधिकार का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक मंचों पर अपनी बात रखते समय सामाजिक मर्यादाओं, शालीनता और नैतिकता की सभी सीमाओं को लांघ जाए।

इससे पहले, जब समय रैना द्वारा विदेश में अपने किसी शो के दौरान इस चल रहे गंभीर कानूनी मामले पर कुछ हल्की और मजाकिए टिप्पणियां की गई थीं, तब भी सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। अदालत ने चेतावनी देते हुए कहा था कि न्यायिक प्रक्रियाओं और अदालत को कभी भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। इसके अलावा, अदालत के पिछले निर्देशों का पूरी तरह पालन न किए जाने पर नाराजगी जताते हुए बेंच ने समय रैना, रणवीर इलाहाबादिया और अन्य उत्तरदाताओं पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था तथा हलफनामा दाखिल करने के सख्त निर्देश दिए थे।

सभी आपराधिक मामले हुए खत्म

अब सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलों और जुर्माने की शर्तों को ध्यान में रखते हुए इस पूरे विवाद से जुड़े देश भर के सभी मुकदमों और कानूनी कार्यवाहियों को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है। इस फैसले के बाद समय रैना और रणवीर इलाहाबादिया ने राहत की सांस ली है, लेकिन यह मामला डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उसकी जिम्मेदारी के बीच की बारीक रेखा को लेकर एक बड़ा सबक बन गया है।

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