Saudi Arabia Oil Plant Attack: खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की विभीषिका अब बेकाबू होती दिख रही है। मंगलवार की रात सऊदी अरब के औद्योगिक गढ़ माने जाने वाले पूर्वी शहर जुबैल (Jubail) में एक भीषण हमला हुआ, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। खबरों के मुताबिक, हमला सऊदी अरब की दिग्गज पेट्रोकेमिकल कंपनी ‘साहबिक’ (SABIC) के विशाल कॉम्प्लेक्स पर किया गया। चश्मदीदों ने बताया कि धमाके इतने शक्तिशाली थे कि उनकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई और देखते ही देखते आसमान आग की लाल लपटों और काले धुएं से भर गया। जुबैल दुनिया के उन चुनिंदा शहरों में शामिल है जहाँ स्टील, पेट्रोल और खाद का भारी मात्रा में उत्पादन होता है, ऐसे में यहाँ हमला होना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़े खतरे का संकेत है।
एयर डिफेंस की मुस्तैदी: 7 बैलिस्टिक मिसाइलें ढेर, पर मलबे ने मचाई तबाही
सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने इस हमले की आधिकारिक पुष्टि करते हुए अपनी सैन्य सफलता का विवरण साझा किया है। मंत्रालय के अनुसार, उनके उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम ने पूर्वी क्षेत्र की ओर बढ़ती हुई 7 घातक बैलिस्टिक मिसाइलों को बीच हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। हालांकि, मिसाइलों के पूरी तरह नष्ट होने के बावजूद उनका जलता हुआ भारी मलबा रिहायशी और औद्योगिक इलाकों में गिरा। इस मलबे की चपेट में आने से कई बिजली घरों और बुनियादी सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। सुरक्षा अधिकारी फिलहाल इस बात का आकलन कर रहे हैं कि प्लांट की उत्पादन क्षमता और आसपास की संपत्तियों को कुल कितना वित्तीय नुकसान हुआ है।
ईरान-इजरायल टकराव का विस्तार: एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर आमने-सामने की जंग
यह हमला उस वक्त हुआ है जब मिडिल ईस्ट में ‘ऊर्जा युद्ध’ (Energy War) छिड़ चुका है। महज 24 घंटे पहले इजरायल ने ईरान के सबसे महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल हब ‘असालुयेह’ पर एक विनाशकारी हमले की जिम्मेदारी ली थी। ईरान में हुए उन धमाकों के तुरंत बाद सऊदी अरब के तेल ठिकानों को निशाना बनाना एक सोची-समझी जवाबी कार्रवाई मानी जा रही है। सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष इसी तरह एक-दूसरे के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाते रहे, तो वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है, जिससे दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है।
किंग फहद कॉजवे पर पाबंदी: सुरक्षा के मद्देनजर बहरीन सीमा सील
हमले की गंभीरता और संभावित भविष्य के खतरों को देखते हुए सऊदी अरब प्रशासन ने कड़े सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। एहतियात के तौर पर सऊदी अरब को बहरीन से जोड़ने वाले ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘किंग फहद कॉजवे’ (King Fahd Causeway) को यातायात के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। 25 किलोमीटर लंबे इस पुल पर आवाजाही रोकने का उद्देश्य किसी भी आत्मघाती हमले या अप्रिय घटना को टालना है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे सुरक्षा बलों के साथ सहयोग करें और स्थिति सामान्य होने तक सीमाओं की ओर रुख न करें।
सऊदी का ईरान पर सीधा आरोप: बौखलाहट में तेल ठिकानों को बनाया निशाना
सऊदी अरब ने इस पूरी तबाही और तनाव के लिए सीधे तौर पर तेहरान को कटघरे में खड़ा किया है। रियाद का दावा है कि फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से ईरानी नेतृत्व बौखलाया हुआ है। सऊदी अधिकारियों के अनुसार, ईरान जानबूझकर पड़ोसी देशों के तेल और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बना रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाया जा सके। फिलहाल, पूरे खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में ‘हाई अलर्ट’ घोषित कर दिया गया है और सऊदी सेना अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। आगामी कुछ घंटे इस क्षेत्र के भविष्य के लिए अत्यंत निर्णायक साबित हो सकते हैं।
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