Satyaki Savarkar : कांग्रेस नेता राहुल गांधी और वीर सावरकर के परिवार के बीच चल रही कानूनी लड़ाई में एक चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। पुणे की विशेष MP-MLA कोर्ट में सुनवाई के दौरान, सावरकर के पोते और शिकायतकर्ता सत्यकी सावरकर ने उन कई ऐतिहासिक तथ्यों को स्वीकार कर लिया है, जिन्हें राहुल गांधी अक्सर अपने भाषणों में उठाते रहे हैं। सत्यकी ने अदालत में माना कि सावरकर ने सेलुलर जेल में रहने के दौरान ब्रिटिश हुकूमत को पांच बार दया याचिकाएं (माफीनामे) भेजी थीं। हालांकि, उन्होंने यह तर्क भी दिया कि उस समय कई अन्य राजनीतिक कैदियों ने भी जेल से बाहर आने के लिए इसी तरह की विनती ब्रिटिश सरकार से की थी।
ब्रिटिश सेना में भर्ती का प्रस्ताव: सैन्य प्रशिक्षण की थी रणनीति
अदालती कार्यवाही के दौरान एक और महत्वपूर्ण बिंदु पर सहमति बनी। सत्यकी सावरकर ने राहुल गांधी के वकीलों के उस तर्क को स्वीकार किया कि सावरकर ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीयों को ब्रिटिश सेना में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया था और स्वयं भी इसके लिए आवेदन किया था। सत्यकी ने इसके पीछे के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि सावरकर का मुख्य इरादा ब्रिटिश सेवा करना नहीं, बल्कि भारतीय युवाओं को सैन्य कौशल, हथियारों के उपयोग और युद्ध का अनुभव दिलाना था। उनका मानना था कि आज़ाद भारत के पास अपनी प्रशिक्षित सेना होनी चाहिए, और ब्रिटिश सेना का हिस्सा बनना उस समय प्रशिक्षण का सबसे सुलभ जरिया था।
टू-नेशन थ्योरी पर स्पष्टीकरण: ‘सावरकर प्रस्तावक नहीं, केवल टिप्पणीकार थे’
कांग्रेस लगातार वीर सावरकर को ‘टू-नेशन थ्योरी’ (द्वि-राष्ट्र सिद्धांत) का जनक बताती रही है। इस पर सत्यकी सावरकर ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सावरकर इस सिद्धांत के समर्थक या रचयिता नहीं थे। उन्होंने दावा किया कि यह प्रस्ताव मूल रूप से सर सैयद अहमद खान का था। सत्यकी के अनुसार, सावरकर ने केवल उस समय की वास्तविक राजनीतिक स्थितियों पर टिप्पणी की थी, न कि देश के विभाजन का खाका तैयार किया था। उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सावरकर के विचारों को अक्सर संदर्भ से बाहर पेश किया जाता है।
गाय पर दृष्टिकोण: ‘भगवान नहीं, उपयोगी जानवर’
सुनवाई के दौरान सावरकर के धार्मिक और सामाजिक विचारों पर भी चर्चा हुई। सत्यकी ने एक बेहद दिलचस्प दावा करते हुए कहा कि वीर सावरकर गाय को ‘भगवान’ की तरह पूजने के पक्ष में नहीं थे। इसके विपरीत, सावरकर का मानना था कि गाय एक अत्यंत उपयोगी पशु (काम का जानवर) है और उसे उसी वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। सत्यकी ने स्वीकार किया कि राहुल गांधी द्वारा लगाए गए सावरकर के व्यक्तित्व से जुड़े कई पहलुओं पर ऐतिहासिक सहमति है, लेकिन उन्होंने ‘अपमानजनक मंशा’ और ‘गलत बयानी’ के आरोपों पर अपनी आपत्ति बरकरार रखी।
पुणे की अदालत में कानूनी जंग: राजनीतिक फायदे के लिए अपमान का आरोप
उल्लेखनीय है कि यह पूरा मामला राहुल गांधी द्वारा लंदन में दिए गए एक भाषण से शुरू हुआ था। सत्यकी सावरकर ने 5 मार्च, 2023 को दिए गए राहुल के बयान को आधार बनाकर मानहानि का दावा किया था। उनका आरोप है कि राहुल गांधी जानबूझकर राजनीतिक लाभ के लिए सावरकर की छवि धूमिल करने वाली झूठी जानकारी फैला रहे हैं। सत्यकी का तर्क है कि राहुल को वास्तविक तथ्यों का ज्ञान होने के बावजूद, वे सालों से सावरकर को बदनाम कर रहे हैं। फिलहाल कोर्ट में इस हाई-प्रोफाइल मामले की जिरह जारी है, जिसने एक बार फिर सावरकर के ऐतिहासिक योगदान और विवादों को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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