Jharkhand Hospital News : झारखंड के सरायकेला में शर्मनाक वाकया, मोबाइल टॉर्च की रोशनी में प्रसव, जच्चा-बच्चा की मौत

झारखंड के सरायकेला में स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे डरावनी तस्वीर सामने आई है। बिजली गुल होने पर टॉर्च की रोशनी में प्रसव कराया गया, जिसने एक मां और उसके मासूम बच्चे की जान ले ली। इस खौफनाक लापरवाही ने पूरे राज्य को हिला दिया है। आखिर इस दोहरी मौत का असली गुनहगार कौन है?

Jharkhand Hospital News

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 3, 2026

Jharkhand Hospital News : झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहाँ राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) की घोर लापरवाही ने एक हँसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। विडंबना यह है कि जान गंवाने वाली महिला, विनीता बानरा, खुद एक ‘स्वास्थ्य सहिया’ थी। जो महिला दिन-रात दूसरों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूक करती थी, उसे खुद अपने ही विभाग के तंत्र ने मौत के मुँह में धकेल दिया। अस्पताल में बिजली गुल होने और बैकअप की कोई व्यवस्था न होने के कारण, मोबाइल की टॉर्च जलाकर उसका प्रसव कराया गया, जिसका अंत मां और नवजात की मौत के साथ हुआ।

अंधेरे अस्पताल और नदारद डॉक्टरों का जानलेवा गठजोड़

परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। बताया जा रहा है कि जब विनीता को प्रसव पीड़ा हुई, तब अस्पताल में बिजली नहीं थी। हैरान करने वाली बात यह है कि इस गंभीर स्थिति में भी अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। पूरी जिम्मेदारी नर्सों के कंधों पर छोड़ दी गई थी। जब प्रसूता की हालत बिगड़ने लगी, तब वहां मौजूद स्टाफ ने जनरेटर या इन्वर्टर का इंतजाम करने के बजाय मोबाइल फोन की टॉर्च जलाई और उसी मद्धम रोशनी में प्रसव की प्रक्रिया को अंजाम देने की कोशिश की। यह आधुनिक युग में चिकित्सा विज्ञान का सबसे डरावना और पिछड़ा चेहरा है।

परिजनों का गंभीर आरोप: लापरवाही को छिपाने की हुई कोशिश

मृतका के पति दुर्गाचरण बानरा ने स्वास्थ्य केंद्र प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नर्सों ने डॉक्टर को तब फोन किया जब स्थिति उनके नियंत्रण से बाहर हो चुकी थी। अगर समय रहते विनीता को किसी बेहतर या बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया जाता, तो शायद आज दोनों की जान बच सकती थी। परिजनों का गुस्सा इस बात पर भी फूटा कि घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने अपनी गलती मानने के बजाय, बिना किसी कानूनी या चिकित्सकीय औपचारिकताओं के, जल्दबाजी में शव को घर भेज दिया। यह सीधे तौर पर मामले को रफा-दफा करने और सबूतों को मिटाने की कोशिश प्रतीत होती है।

अस्पताल प्रशासन की दलील: ‘पीपीएच’ को बताया मौत की वजह

दूसरी ओर, ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर कुंकल ने अपनी सफाई में इन आरोपों को कमतर आंकने की कोशिश की है। डॉक्टर का कहना है कि यह मामला ‘पोस्टपार्टम हेमरेज’ (PPH) का था, जिसमें प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव होता है। उनके अनुसार, महिला की स्थिति शुरू से ही नाजुक थी और चिकित्सा कर्मियों ने उसे बचाने के लिए भरसक प्रयास किए। हालांकि, डॉक्टर की यह दलील इस सवाल का जवाब नहीं दे पाई कि आखिर एक संवेदनशील चिकित्सा केंद्र में बिजली का बैकअप क्यों नहीं था और एक नाजुक स्थिति वाले मरीज को मोबाइल की लाइट में क्यों छोड़ दिया गया?

झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठते गंभीर सवाल

यह घटना केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि झारखंड के ग्रामीण इलाकों में चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था का जीता-जागता सबूत है। ‘स्वास्थ्य सहिया’ जैसी ग्रासरूट वर्कर्स, जो स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ मानी जाती हैं, अगर वे ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता का क्या होगा? सरायकेला की इस घटना ने सरकार के उन दावों की पोल खोल दी है जिनमें हर गाँव तक हाई-टेक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुँचाने की बात कही जाती है। बिजली, डॉक्टर और बुनियादी संसाधनों के बिना चल रहे ये स्वास्थ्य केंद्र अब जीवन रक्षक के बजाय मौत के अड्डे बनते जा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने अब इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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