Parliament Budget Session: संसद के वर्तमान बजट सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच छिड़ी जंग शांत होती नहीं दिख रही है। सोमवार को लोकसभा की शुरुआत होते ही विपक्षी सांसदों ने विभिन्न ज्वलंत मुद्दों और हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों पर चर्चा की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया। सांसद नारेबाजी करते हुए सदन के बीचों-बीच यानी वेल में जमा हो गए। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा बार-बार शांति बनाए रखने और प्रश्नकाल चलने देने की अपील का सदस्यों पर कोई असर नहीं हुआ। शोर-शराबे और अव्यवस्था के चलते अध्यक्ष ने भारी मन से सदन की कार्यवाही को मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
रायबरेली में दर्दनाक हादसा: तेज रफ्तार कार की चपेट में आए 8 लोग, चार की मौत
लोकसभा अध्यक्ष की नसीहत और बढ़ता गतिरोध
बताते चले कि, सदन में बढ़ते हंगामे को देख लोकसभा अध्यक्ष ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि संसद चर्चा और संवाद का केंद्र है, न कि केवल नारेबाजी का स्थान। उन्होंने जोर दिया कि देश की जनता की अपेक्षा है कि उनके हितों से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार-विमर्श हो। हालांकि, विपक्षी सदस्यों के कड़े तेवरों और लगातार हो रही नारेबाजी के कारण सदन की गरिमा को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया। सदन की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए, कार्यवाही को पहले कुछ समय के लिए और फिर अंततः पूरे दिन के लिए रोक दिया गया, जिससे जनहित के कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा बीच में ही अटक गई है।
राहुल गांधी के संबोधन पर रार और सत्ता पक्ष की आपत्ति
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, दोपहर दो बजे जब सदन की कार्यवाही पुनः आरंभ हुई, तो माहौल तब और गरमा गया जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी किसी विषय पर अपनी बात रखना चाहते थे। पीठासीन अधिकारी संध्या राय ने स्पष्ट किया कि बजट पर चर्चा के लिए वे स्वतंत्र हैं, परंतु किसी अन्य विशेष मुद्दे पर बोलने के लिए कोई पूर्व नोटिस नहीं दिया गया है। इस पर सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि नियमानुसार बिना पूर्व सूचना के किसी भी विषय को उठाना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में भी राहुल गांधी के बोलने के विषय पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी।
संसदीय कार्यप्रणाली में बाधा और भविष्य की चुनौतियां
सदन में जारी इस खींचतान का सीधा असर विधायी कामकाज पर पड़ रहा है। संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि बिना सूचना के पीठासीन अधिकारियों पर आरोप लगाए जाएंगे, तो सदन का संचालन सुचारू रूप से करना संभव नहीं होगा। हंगामे का सिलसिला जारी रहने के कारण अंततः सदन को कल तक के लिए बंद कर दिया गया। अब सभी की निगाहें मंगलवार की सुबह पर टिकी हैं, जहाँ उम्मीद की जा रही है कि दोनों पक्षों के बीच कोई सर्वसम्मत रास्ता निकलेगा ताकि बजट सत्र के बचे हुए समय का सदुपयोग हो सके और जनता से जुड़े मुद्दों पर सार्थक बहस संभव हो।
कर्नाटक में सड़क हादसों का कहर: बीदर और कोलार में 6 लोगों की मौत










