Sankashti Chaturthi 2026: संकष्टी चतुर्थी पर करें इन महामंत्रों का जाप, पूरी होगी हर मनोकामना!

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 5 फरवरी 2026 को है, इस दिन भगवान गणेश और चंद्रमा की विशेष पूजा की जाती है। चंद्रोदय रात 9:37 बजे होगा, व्रत रखने और मंत्र जाप करने के लिए यह शुभ समय माना जाता है।

Sankashti Chaturthi 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

फ़रवरी 5, 2026

Sankashti Chaturthi 2026: संकष्टी चतुर्थी हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह विशेष रूप से भगवान गणेश जी की पूजा के लिए समर्पित दिन है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, और वर्ष 2026 में यह दिन गुरुवार, 5 फरवरी को पड़ रहा है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और संकट समाप्त होते हैं।

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संकष्टी चतुर्थी का महत्व

Sankashti Chaturthi 2026
करें इन महामंत्रों का जाप

संकष्टी चतुर्थी को विशेष रूप से भगवान गणेश के द्विजप्रिय स्वरूप की पूजा के लिए जाना जाता है। इसे द्विजप्रिय संकष्टी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश की आराधना करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाओं, विघ्नों और कष्टों का नाश होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी पर व्रत रखने से भक्त के सभी संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।

इस दिन चंद्रमा का उदय और उसका दर्शन भी बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। व्रत केवल तभी पूर्ण माना जाता है जब व्रती चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा समाप्त करता है।

चंद्रोदय का समय

5 फरवरी 2026 को संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रमा रात्रि में 9 बजकर 37 मिनट पर उदय होंगे। ध्यान रखें कि शहर और मौसम के अनुसार समय में कुछ अंतर हो सकता है। चंद्रमा उदय होने के बाद दर्शन और अर्घ्य देने के साथ ही व्रत खोलने की परंपरा है।

संकष्टी चतुर्थी व्रत

इस दिन व्रत रखने से भगवान गणेश के द्विजप्रिय रूप की पूजा की जाती है। व्रती पूरे दिन निर्जल या भोजन सहित व्रत रखते हैं और चंद्रमा दर्शन के बाद पूजा संपन्न कर व्रत खोलते हैं। यह व्रत विशेष रूप से भक्तार्तिनाशन और संकटमोचन के लिए लाभकारी माना जाता है।

संकष्टी चतुर्थी के मंत्र और उनका महाजाप

इस दिन मंत्र जाप करने से लाभ कई गुना बढ़ जाता है। यहाँ कुछ प्रमुख मंत्र दिए गए हैं जिनका जाप संकष्टी चतुर्थी पर विशेष रूप से किया जाता है:

मुख्य गणेश मंत्र:

श्री गणेशाय नमः

ऊँ विघ्नेश्वराय नमः

वक्र तुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ:। निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभ कार्येषु सर्वदा॥

ॐ नमो हेरम्ब मद मोहित मम् संकटान निवारय-निवारय स्वाहा।

ॐ वक्रतुण्डाय हुं।

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।

गणेश वंदना मंत्र:

गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम्।

उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्।।।

अन्य प्रमुख मंत्र:

Sankashti Chaturthi 2026
करें इन महामंत्रों का जाप

सिद्ध लक्ष्मी मनोरहप्रियाय नमः। ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये। वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नम:।।

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धितायं। नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥

भक्तार्तिनाशनपराय गनेशाश्वराय, सर्वेश्वराय शुभदाय सुरेश्वराय! विद्याधराय विकटाय च वामनाय, भक्त प्रसन्नवरदाय नमो नमस्ते!!

संकष्टी चतुर्थी पर किए जाने वाले उपाय

संकष्टी चतुर्थी के दिन लोग अपने घर में गणेश जी की स्थापना कर विधिपूर्वक पूजा करते हैं। व्रती इस दिन मंत्र जाप के साथ-साथ अपनी समस्याओं और बाधाओं से छुटकारा पाने के लिए ध्यान और प्रार्थना भी करते हैं। इस दिन किए गए उपाय और जाप से जीवन में आने वाले संकटों का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।