Ambassador to North Korea : उत्तर कोरिया में भारत के अगले राजदूत बने संजीव जैन, जल्द संभालेंगे नई राजनयिक जिम्मेदारी

भारत सरकार ने वरिष्ठ भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी संजीव जैन को उत्तर कोरिया (डीपीआरके) में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया है। वर्तमान में काबो वर्डे में भारत के राजदूत के रूप में कार्यरत संजीव जैन जल्द ही नई जिम्मेदारी संभालेंगे। आखिर इस नियुक्ति का रणनीतिक महत्व क्या है और भारत-उत्तर कोरिया संबंधों पर इसका क्या असर पड़ सकता है, जानिए पूरी रिपोर्ट।

North Korea

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 7, 2026

Ambassador to North Korea : विदेश मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण राजनयिक फेरबदल करते हुए संजीव जैन को डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (उत्तर कोरिया) में भारत का नया राजदूत नियुक्त करने की घोषणा की है। वर्तमान में संजीव जैन काबो वर्डे में भारत के राजदूत के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मंत्रालय के अनुसार, वे जल्द ही उत्तर कोरिया में अपना नया कार्यभार संभालेंगे। उनकी यह नियुक्ति भारत के राजनयिक संबंधों को उत्तर कोरिया के साथ और अधिक मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

संजीव जैन का व्यापक अनुभव और करियर

संजीव जैन का अब तक का राजनयिक करियर बेहद प्रभावशाली रहा है। काबो वर्डे में भारत के पहले निवासी राजदूत के रूप में उन्होंने संसदीय मामलों, प्रशासन, विज्ञान-तकनीक और वाणिज्यिक संबंधों जैसे विविध क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य किया है। अपने करियर के दौरान उन्होंने दुबई, पेरिस, कैंडी, बर्लिन, टोक्यो और ओसाका जैसे वैश्विक केंद्रों में भारतीय दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं। काबो वर्डे में तैनाती से पहले, वे विदेश मंत्रालय के मुख्यालय में ‘आसियान’ देशों के विभाग को संभाल रहे थे। इसके अलावा, गोवा में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के प्रबंधन में भी उनकी भूमिका अत्यंत सराहनीय रही है। संजीव जैन अब दक्षिण कोरिया में वर्तमान भारतीय राजदूत गौरंगलाल दास का स्थान लेंगे।

भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों का स्वर्ण काल

संजीव जैन की नियुक्ति के साथ ही भारत के पूर्वी एशियाई देशों के साथ राजनयिक संबंधों पर भी चर्चा तेज हो गई है। भारत और दक्षिण कोरिया के बीच राजनयिक संबंधों की नींव 10 दिसंबर 1973 को रखी गई थी, जबकि वाणिज्यिक स्तर पर यह संबंध 1962 में ही शुरू हो गए थे। दोनों देशों के बीच की प्रगाढ़ होती दोस्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2010 में इसे ‘स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा दिया गया, जिसे 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोल यात्रा के दौरान और बेहतर करते हुए ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ में अपग्रेड कर दिया गया। वर्ष 2023 में दोनों राष्ट्रों ने अपने राजनयिक संबंधों के 50 गौरवशाली वर्षों का जश्न मनाया।

उच्च स्तरीय द्विपक्षीय यात्राओं का बढ़ता महत्व

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग की हालिया भारत यात्रा ने इन संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है। इस वर्ष 19 से 21 अप्रैल के बीच राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने भारत का राजकीय दौरा किया, जो उनके पदभार संभालने के बाद किसी भी दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की पहली और सबसे महत्वपूर्ण भारत यात्रा थी। इस दौरे में उनके साथ मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और दक्षिण कोरियाई दिग्गज कंपनियों के सीईओ (CEO) का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया था। यह यात्रा भारत और दक्षिण कोरिया के बीच व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक सशक्त बनाने के दृष्टिकोण से बेहद सफल रही। उत्तर कोरिया में संजीव जैन की नई नियुक्ति इस पूरे क्षेत्र में भारत के बढ़ते राजनयिक प्रभाव और रणनीतिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट करती है।

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