Sanjay Raut on Iran-Israel War: शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र ‘सामना’ ने एक बार फिर अपने तेवर कड़े करते हुए ईरान-इजरायल युद्ध के बहाने वैश्विक राजनीति और भारत की भूमिका पर निशाना साधा है। पार्टी नेता संजय राउत द्वारा लिखे गए लेख “कॉकरोच मरते नहीं” में अमेरिका के हस्तक्षेप और इजरायल की सैन्य कार्रवाई की कड़ी आलोचना की गई है। लेख में दावा किया गया है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों का उद्देश्य केवल सैन्य जीत नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण स्थापित करना है। संजय राउत ने इस युद्ध को आधुनिक युग की साम्राज्यवादी सोच का परिणाम बताया है और आगाह किया है कि इसके परिणाम पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी होंगे।
युद्ध और कूटनीति: ट्रंप और नेतान्याहू की नीतियों पर उठाए सवाल
लेख के अनुसार, इतिहास गवाह है कि राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अक्सर युद्ध का सहारा लिया जाता रहा है। संजय राउत ने तर्क दिया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू की आक्रामक नीतियों ने इस संघर्ष को हवा दी है। लेख में आरोप लगाया गया है कि ईरान की जनता को ‘तानाशाही से मुक्ति’ दिलाने का दावा महज एक दिखावा है, जबकि इसके पीछे वास्तविक मंशा मध्य-पूर्व के संसाधनों और तेल पर कब्जा करना है। राउत ने 1950 में तिब्बत पर चीन के कब्जे का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह माओ त्से तुंग ने आजादी के नाम पर तिब्बत को हड़प लिया था, वैसी ही स्थिति आज ईरान में पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
ईरान का प्रतिरोध: “आसानी से नहीं झुकेगा तेहरान”
संजय राउत ने लेख में यह भी रेखांकित किया है कि पश्चिमी शक्तियों का यह सोचना गलत था कि वे ईरान को बहुत जल्द घुटनों पर ले आएंगे। अमेरिकी और इजरायली रणनीतिकारों को लगा था कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की हत्या के बाद ईरान बिखर जाएगा, लेकिन हकीकत इसके उलट रही। लेख के अनुसार, शीर्ष नेतृत्व और सैन्य अधिकारियों के मारे जाने के बावजूद ईरान ने जवाबी कार्रवाई जारी रखी है। इजरायल की राजधानी तेल अवीव पर हुए मिसाइल हमलों और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बढ़ते खतरों का जिक्र करते हुए राउत ने कहा कि यह युद्ध अब किसी एक पक्ष के नियंत्रण में नहीं रहा है।
मानवता का संकट: गाजा और वैश्विक शांति पर गहराता खतरा
सामना के लेख में युद्ध के मानवीय पक्ष पर भी गहरी चिंता जताई गई है। संजय राउत ने लिखा कि गाजा पट्टी से लेकर ईरान तक चल रही इस हिंसा में मासूम बच्चों और आम नागरिकों की जान जा रही है, जो मानवता के लिए एक बड़ा कलंक है। लेख में आरोप लगाया गया है कि दुनिया के कई शक्तिशाली देश इस नरसंहार पर चुप्पी साधे हुए हैं। राउत ने दावा किया कि बाहरी हमलों के बावजूद ईरान की जनता एकजुट है और वे किसी भी बाहरी दबाव के सामने झुकने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने अमेरिका की वैश्विक विस्तारवादी नीतियों की आलोचना करते हुए इसे वैश्विक शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया।
भारत की कूटनीति पर तंज: पीएम मोदी के नेतृत्व पर उठाए सवाल
लेख के अंतिम हिस्से में संजय राउत ने भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर सीधा प्रहार किया है। राउत ने सवाल उठाया कि एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी को विश्व स्तर पर एक मजबूत और प्रभावी नेता (विश्वगुरु) के रूप में पेश किया जाता है, लेकिन ईरान-इजरायल जैसे गंभीर संकट के दौरान भारत की भूमिका ‘कमजोर और मौन’ क्यों दिखाई दे रही है? लेख में यह भी उल्लेख किया गया कि फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री की इजरायल यात्रा के बाद क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय और बढ़ गया। सामना के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम में भारत की ओर से कोई ठोस शांति पहल न होना चिंताजनक है। लेख का निष्कर्ष “कॉकरोच मरते नहीं” के रूप में देते हुए राउत ने स्पष्ट किया कि ईरान जैसी शक्तियों को पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं है।
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