Bengal Violence : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों से हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि राज्य में जारी राजनीतिक प्रतिशोध की आग को और हवा दे दी है। कई जिलों में पार्टी कार्यालयों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे आम जनता के बीच भय का माहौल व्याप्त है।
संजय राउत का विवादित बयान: “बंगाल को गुजरात बनाना चाहती है बीजेपी”
बंगाल की इस अशांति पर अब पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र की राजनीति भी गरमा गई है। शिवसेना (यूबीटी) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस हिंसा के लिए सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी को जिम्मेदार ठहराया है। मीडिया से मुखातिब होते हुए राउत ने बेहद कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि बीजेपी की मंशा बंगाल को अशांत करने की है। उन्होंने आरोप लगाया, “बीजेपी चाहती है कि बंगाल में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़के ताकि इसकी चपेट में पूरा देश आ जाए। बिना हिंसा के बीजेपी चुनाव नहीं लड़ सकती। वे बंगाल को गुजरात के मॉडल पर ले जाकर पूरे देश में नफरत की आग फैलाना चाहते हैं।”
संदेशखाली में सुरक्षाबलों पर हमला: फायरिंग में पांच जवान घायल
राज्य में हिंसा का सबसे भयावह रूप संदेशखाली में देखने को मिला, जहाँ मंगलवार देर रात उपद्रवियों ने जमकर बवाल काटा। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीणों को डराने-धमकाने की सूचना मिलने पर जब पुलिस और केंद्रीय बलों की टीम न्याजत थाना क्षेत्र में पहुंची, तो उन पर अचानक हमला कर दिया गया। इस हिंसक झड़प और फायरिंग में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के 5 जवान गंभीर रूप से जख्मी हो गए, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह घटना दर्शाती है कि अराजक तत्वों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे सुरक्षा एजेंसियों को भी निशाना बनाने से नहीं चूक रहे हैं।
टीएमसी और बीजेपी समर्थकों में भिड़ंत: कई जिलों में आगजनी की घटनाएं
हिंसा की आग संदेशखाली तक ही सीमित नहीं है। हावड़ा के जगतबल्लभपुर में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यालय को आग के हवाले कर दिया गया। वहीं, कोलकाता के हॉग मार्केट इलाके में भी समर्थकों के बीच जमकर संघर्ष हुआ। जलपाईगुड़ी, दक्षिण 24 परगना और आसनसोल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से भी टीएमसी और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प, पथराव और आगजनी की निरंतर रिपोर्टें आ रही हैं। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता अब सड़कों पर खुले संघर्ष का रूप ले चुकी है, जिससे प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं।
ममता बनर्जी का बचाव: “लोकतंत्र की हार हुई है, ममता की नहीं”
संजय राउत ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि बंगाल के नतीजों को ममता की व्यक्तिगत हार के रूप में देखना गलत होगा। उन्होंने इसे ‘लोकतंत्र की हार’ करार दिया। राउत ने ममता बनर्जी द्वारा चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कई बूथों पर अनियमितताएं हुई हैं, जिसके कारण ममता का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा न देने का फैसला उनके संघर्ष और आंदोलन का एक हिस्सा है। राउत के अनुसार, जो लोग ममता की हार पर जश्न मना रहे हैं, वे असल में लोकतांत्रिक मूल्यों के पतन पर खुश हो रहे हैं।










