UP News: उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के एक बयान ने प्रदेश की सियासत में हलचल तेज कर दी है। निषाद पार्टी के 11वें स्थापना दिवस पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए संजय निषाद ने बीजेपी को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसकी अब राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी ने निषाद समाज की मांगों और अपील को नहीं सुना तो उसे भी सत्ता से बाहर होना पड़ सकता है।
निषाद पार्टी के स्थापना दिवस पर संजय निषाद का बड़ा बयान
बताते चले कि, लखनऊ में 16 अगस्त को निषाद पार्टी का 11वां स्थापना दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक पहुंचे थे। इसी दौरान संजय निषाद ने निषाद समाज को आरक्षण देने की मांग को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समाज लंबे समय से अपने अधिकार और आरक्षण के लिए संघर्ष कर रहा है और यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।
आरक्षण के मुद्दे पर निषाद समाज को हक दिलाने का संकल्प
संजय निषाद ने अपने संबोधन में कहा कि निषाद समाज को उसका अधिकार और आरक्षण मिलने तक संघर्ष खत्म नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि करीब दस साल पहले उन्होंने निषाद समाज को अनुसूचित जाति की आरक्षण व्यवस्था में शामिल कराने का संकल्प लिया था। उनके मुताबिक, जब तक समाज को उसका हक नहीं मिलता, तब तक वह इस मुद्दे पर पीछे हटने वाले नहीं हैं।
‘सपा, बसपा और कांग्रेस नहीं सुन पाए तो सत्ता से बाहर हुए’
संजय निषाद ने मंच से बीजेपी को लेकर तीखा राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि निषाद समाज की अपील को पहले हाथी, साइकिल और पंजे ने नहीं सुना और यही वजह रही कि ये दल सत्ता से बाहर हो गए। उन्होंने आगे कहा कि अगर बीजेपी भी निषाद समाज की बात नहीं सुनेगी तो उसे भी सत्ता से बाहर जाना पड़ सकता है।
बीजेपी को चेतावनी या गठबंधन में दबाव की राजनीति?
संजय निषाद के इस बयान को लेकर अब कई तरह के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। एक तरफ इसे निषाद समाज की आरक्षण संबंधी मांग को लेकर बीजेपी पर दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ आगामी विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए गठबंधन में अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी मजबूत करने की रणनीति से भी इसे जोड़कर देखा जा रहा है।
संजय निषाद ने पूर्वजों के योगदान का किया जिक्र
कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए संजय निषाद ने निषाद समाज के इतिहास और योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनके पूर्वजों ने देश की आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया और देश को स्वतंत्र कराने में योगदान दिया। साथ ही उन्होंने संविधान निर्माण में भी अपने पूर्वजों की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि निषाद समाज अपने अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करता रहा है।
आरक्षण मिलने तक जारी रहेगा निषाद समाज का संघर्ष
संजय निषाद ने स्पष्ट किया कि निषाद समाज की आरक्षण की मांग केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि इसे वह समाज के अधिकार से जोड़कर देखते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संघर्ष जारी रखने की अपील करते हुए कहा कि जब तक निषाद समाज को उसका हक नहीं मिलता, तब तक आंदोलन और मांग जारी रहेगी।
यूपी चुनाव से पहले संजय निषाद के बयान के सियासी मायने
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से पहले संजय निषाद के बयान ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। निषाद पार्टी एनडीए का हिस्सा है और ऐसे में बीजेपी को लेकर दिया गया यह बयान गठबंधन की राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक जानकार इसे आने वाले चुनाव में सीट बंटवारे और निषाद समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।
NDA में सीट शेयरिंग पर बढ़ सकता है दबाव
निषाद समाज की उत्तर प्रदेश की राजनीति में अहम भूमिका मानी जाती है। ऐसे में संजय निषाद की ओर से बीजेपी को दिया गया यह संदेश आगामी चुनावी समीकरणों पर असर डाल सकता है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि उनके बयान के बाद बीजेपी की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, लेकिन इतना जरूर है कि चुनाव से पहले निषाद आरक्षण और राजनीतिक हिस्सेदारी का मुद्दा एक बार फिर यूपी की सियासत के केंद्र में आ गया है।










