NEET-UG Protest: देश भर में नीट-यूजी (NEET-UG 2026) पेपर लीक और उसके बाद उपजे तनावपूर्ण हालातों के बीच अब खेल जगत की बड़ी हस्तियां भी खुलकर छात्रों के समर्थन में सामने आने लगी हैं। इसी कड़ी में पूर्व भारतीय क्रिकेटर और जाने-माने कमेंटेटर संजय मांजरेकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक प्रभावशाली पोस्ट साझा किया है। उन्होंने अपने संदेश में दोटूक शब्दों में कहा कि वह पूरी तरह से भारत के मेहनतकश युवाओं और छात्रों के साथ खड़े हैं। मांजरेकर ने प्रशासन और सिस्टम को नसीहत देते हुए लिखा कि छात्रों को दबाने या उनका दमन करने के बजाय उन्हें आगे बढ़ने और अपनी उड़ान भरने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए, क्योंकि यही युवा आने वाले कल में भारत को नई बुलंदियों और ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखते हैं।
युवराज सिंह की अपील और विजन
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज ऑलराउंडर युवराज सिंह ने भी इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया अकाउंट पर एक भावुक और प्रेरणादायक स्टोरी साझा की है। युवराज ने अपने संदेश में देश के हर बच्चे, छात्र, महिला और पुरुष के अधिकारों की पैरवी करते हुए लिखा कि हर नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से सीखने, एक सुरक्षित माहौल में आगे बढ़ने और अपने सपनों को हकीकत में बदलने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश के हर नागरिक का कल्याण ही एक उज्जवल और सशक्त भारत की मजबूत नींव तैयार करता है। इसके साथ ही उन्होंने अपील की कि सभी को मिलकर ऐसा समाज बनाना चाहिए जहाँ देखभाल और उम्मीद हो, और किसी भी गतिरोध को केवल आपसी संवाद के जरिए ही सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाया जा सकता है।
स्टार ओपनर बल्लेबाज ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की सराहना की
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार सलामी बल्लेबाज शुभमन गिल ने भी इस राष्ट्रीय मुद्दे पर इंस्टाग्राम स्टोरी के माध्यम से अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया साझा की है। एक युवा भारतीय नागरिक और क्रिकेटर होने के नाते उन्होंने लिखा कि देश की युवा पीढ़ी का यह बुनियादी अधिकार है कि उन्हें अपनी क्षमताओं को सीखने, बड़े सपने देखने और अपने मनचाहे भविष्य को आकार देने का समान अवसर मिलना चाहिए। शुभमन गिल ने अपने संदेश में विशेष रूप से उन सभी देश के युवाओं की सराहना और सम्मान किया, जो इस पूरे दौर में पूरी तरह से संयम रखते हुए शांतिपूर्ण तरीके से अपनी वैध आवाज उठाने के रास्ते पर चल रहे हैं। खिलाड़ियों के इन बयानों से छात्र आंदोलन को एक नई नैतिक ताकत मिली है।










