Sonam Wangchuk Hunger Strike: ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन जैसा है वांगचुक का आंदोलन’, संदीप दीक्षित के बयान से बढ़ी गरमाहट

सोनम वांगचुक के 19 दिवसीय अनशन पर कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने वांगचुक की चुनिंदा सक्रियता पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें हर दमनकारी नीति के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए, न कि केवल अपनी सुविधा के अनुसार।

Sonam Wangchuk Hunger Strike

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 16, 2026

Sonam Wangchuk Hunger Strike: दिल्ली के जंतर-मंतर पर लद्दाख के शिक्षा सुधारक और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन आज 19वें दिन में प्रवेश कर चुका है। स्वास्थ्य की गिरती स्थिति के बीच, उनका वजन 9 किलो से अधिक कम हो चुका है। इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की संवेदनहीनता को देखते हुए किसी को भी अपनी जान जोखिम में डालकर अनशन करने से पहले गंभीरता से सोचना चाहिए।

कांग्रेस नेता का तीखा प्रहार

बताते चले कि, संदीप दीक्षित ने सोनम वांगचुक के आंदोलन की मंशा पर सवाल उठाते हुए उन्हें अतीत की घटनाओं की याद दिलाई। उन्होंने कहा, “जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर उसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया, तब आप (सोनम वांगचुक) इस सरकार के साथ खड़े थे। उस समय वहां लोकतंत्र कमजोर होने और अधिकारों के हनन पर आपने कोई टिप्पणी क्यों नहीं की?” संदीप दीक्षित ने आगे कहा कि देश में सांप्रदायिकता, सरकारी दमन और विपक्षी नेताओं पर ईडी-सीबीआई के इस्तेमाल जैसे गंभीर मुद्दों पर वांगचुक की चुप्पी हैरान करने वाली है।

‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ और मौजूदा आंदोलन में समानता का दावा

संदीप दीक्षित ने इस आंदोलन की तुलना ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ (अन्ना हजारे आंदोलन) से करते हुए इसे एक ‘मॉब’ (भीड़) करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि वांगचुक जिन मुद्दों को उठा रहे हैं, कांग्रेस पार्टी पहले ही उन्हें प्रमुखता से उठाती रही है। दीक्षित ने तंज कसते हुए कहा, “मुझे नहीं लगता कि यह आंदोलन किसी ऊंचे मूल्य या सिद्धांत के लिए है। यह शायद राजनीतिक अवसर तलाशने की कोशिश है। अगर आप वास्तव में लोकतंत्र और शिक्षा के लिए लड़ रहे हैं, तो वही मूल्य आपको देश के अन्य मुद्दों पर भी दिखाने चाहिए थे।”

‘समर्थन योग्य मुद्दे, पर चुनिंदा सक्रियता पर सवाल’

कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि वह वांगचुक की मांगों का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनकी ‘चुनिंदा सक्रियता’ (Selective Activism) की आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोई अन्य नेता या पार्टी यही मुद्दे उठाती है, तो समर्थकों को उसमें राजनीति क्यों दिखने लगती है? उन्होंने सलाह दी कि अगर वांगचुक वास्तव में प्रगतिशील विचारों के योद्धा हैं, तो उन्हें बिना किसी भेदभाव के हर दमनकारी नीति के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए, न कि केवल अपनी सुविधा के अनुसार।