AI Summit Controversy: भारतीय जनता पार्टी के सांसद संबित पात्रा ने गुरुवार को दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने नेहरू को “कंप्रोमाइज्ड” बताते हुए कहा कि इतिहास में कई ऐसे निर्णय हुए, जिन पर सवाल उठाए जाने चाहिए। पात्रा ने कहा कि देश को यह जानने का अधिकार है कि किन परिस्थितियों में महत्वपूर्ण फैसले लिए गए और क्या उन पर किसी प्रकार का बाहरी प्रभाव था।
विदेशी एजेंसियों से जुड़े आरोपों का जिक्र
पात्रा ने अपने बयान में नेहरू के निजी सचिव एम.ओ. माथाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि उस दौर में यह चर्चा रही कि विदेशी खुफिया एजेंसियों की पहुंच प्रधानमंत्री कार्यालय तक थी। 1960 के दशक में सोवियत खुफिया एजेंसी केजीबी का प्रभाव और संवेदनशील दस्तावेजों तक कथित पहुंच जैसे मुद्दों को उन्होंने उठाया। पात्रा का कहना था कि उस समय विदेशी एजेंसियों को आवश्यक सूचनाएं आसानी से मिल जाने की बातें प्रचलित थीं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
ऐतिहासिक फैसलों पर उठाए सवाल
भाजपा सांसद ने कई ऐतिहासिक निर्णयों को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि आखिर इंटेलिजेंस ब्यूरो की अक्साई चिन में चीनी गतिविधियों संबंधी चेतावनी को संसद में अफवाह क्यों बताया गया। कच्छ के रण में 300 वर्ग मील क्षेत्र के मुद्दे, स्वर्ण सिंह-भुट्टो वार्ता के दौरान पुंछ, उरी और गुरेज पर चर्चा, तिब्बत को चीन का हिस्सा मानने का निर्णय, बंगाल के बेरूबारी क्षेत्र का विभाजन और कश्मीर में जनमत संग्रह की बात—इन सभी मुद्दों पर पात्रा ने स्पष्टीकरण की मांग की। उनका कहना था कि इन फैसलों के पीछे की परिस्थितियों को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
ग्वादर पोर्ट प्रस्ताव का जिक्र
पात्रा ने वर्ष 1958 में ओमान के सुल्तान द्वारा ग्वादर पोर्ट भारत को सौंपने की कथित पेशकश का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि उस समय यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता, तो आज रणनीतिक दृष्टि से स्थिति अलग हो सकती थी। वर्तमान में ग्वादर पोर्ट चीन और पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। पात्रा ने सवाल किया कि आखिर किन कारणों से उस प्रस्ताव को ठुकराया गया।
कांग्रेस पर AI समिट को बदनाम करने का आरोप
प्रेस वार्ता में पात्रा ने कांग्रेस पर एक और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर ऐसे संदेश और स्क्रीनशॉट सामने आए हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि एआई इम्पैक्ट समिट के खिलाफ पोस्ट या रील बनाने के लिए 25 हजार से 1.5 लाख रुपये तक के ऑफर दिए गए। पात्रा के अनुसार, ये संदेश कथित तौर पर कांग्रेस कार्यालय या वरिष्ठ नेताओं से जुड़े बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह सही है, तो यह लोकतांत्रिक संवाद को प्रभावित करने का प्रयास है।
जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग
संबित पात्रा ने कहा कि इन सभी मुद्दों पर कांग्रेस नेतृत्व को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि ऐतिहासिक निर्णयों की समीक्षा और वर्तमान आरोपों की जांच लोकतंत्र के हित में है। उनका कहना था कि देश के नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि अतीत में लिए गए फैसलों के पीछे क्या कारण थे और वर्तमान में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा किस प्रकार संचालित हो रही है।









