Sambhal News : उत्तर प्रदेश के संभल जिले में शुक्रवार को प्रशासनिक कार्रवाई का बड़ा नजारा देखने को मिला। मुबारकपुर बंद गांव में स्थित एक मस्जिद की लगभग 35 फीट ऊंची मीनार को दोपहर करीब डेढ़ बजे जमींदोज कर दिया गया। मीनार को गिराने के लिए प्रशासन ने बेहद सावधानी बरती और दो विशेष हाइड्रा मशीनें मंगवाईं। एक मजदूर ने अपनी जान जोखिम में डालकर पहले मीनार के ऊपरी हिस्से पर रस्सी बांधी, जिसके बाद दोनों मशीनों ने मिलकर उसे खींचकर गिरा दिया। मीनार गिरने के बाद अब मस्जिद के शेष हिस्सों को बुलडोजर के जरिए तोड़ने की प्रक्रिया जारी है।
पांच दुकानों और अवैध निर्माणों पर सुबह से ही शुरू हुआ प्रहार
प्रशासनिक कार्रवाई शुक्रवार सुबह करीब साढ़े 9 बजे ही शुरू हो गई थी। दोपहर 1 बजे तक मस्जिद के परिसर से सटी पांच दुकानों को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया। यह कार्रवाई उस सिलसिले की अगली कड़ी है जो 12 दिन पहले शुरू हुई थी। इससे पहले 5 अप्रैल को भी यहां ध्वस्तीकरण अभियान चलाया गया था, जिसमें मदरसा, मस्जिद का मुख्य गेट और दुकानों का अधिकांश हिस्सा तोड़ दिया गया था। हालांकि, उस समय कुछ तकनीकी कारणों और विरोध के भय से मीनार और दुकानों का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा बच गया था, जिसे आज प्रशासन ने पूरी तरह साफ कर दिया।
15 साल पुराने अवैध निर्माण पर डीएम और एसपी की मौजूदगी में कार्रवाई
प्रशासन के अनुसार, इस मस्जिद का निर्माण लगभग 15 साल पहले सरकारी (ग्राम समाज) जमीन पर अवैध रूप से किया गया था। कार्रवाई की संवेदनशीलता को देखते हुए जिलाधिकारी (DM) राजेंद्र पेंसिया और पुलिस अधीक्षक (SP) केके बिश्नोई खुद भारी पुलिस बल के साथ मौके पर तैनात रहे। अभियान के दौरान जब ग्रामीण और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में जुटने लगे, तो स्थिति को बिगड़ते देख पुलिस ने सक्रियता दिखाई और विरोध की किसी भी संभावना को खत्म करने के लिए भीड़ को मौके से खदेड़ दिया। फिलहाल गांव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
पिछली बार बुलडोजर चालक ने मीनार तोड़ने से कर दिया था इनकार
हैरानी की बात यह है कि यह कार्रवाई 5 अप्रैल को ही पूरी होनी थी, लेकिन उस दिन एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई थी। बुलडोजर के चालक ने 35 फीट ऊंची मीनार को गिराने से मना कर दिया था। उसका तर्क था कि मीनार काफी ऊंची और जर्जर है, जो बुलडोजर या उसके ऊपर गिर सकती है, जिससे उसकी जान को खतरा हो सकता है। इसी वजह से उस दिन केवल गेट और मदरसा ही तोड़ा जा सका था। आज प्रशासन ने हाइड्रा मशीनों और रस्सियों के तकनीकी इस्तेमाल से इस बाधा को पार किया और मीनार को सुरक्षित तरीके से गिरा दिया।
मकानों पर भी चला हथौड़ा: ग्रामीणों ने खुद हटाया अपना कब्जा
मस्जिद के अलावा, गांव के ही गुलाम रसूल और आशा कार्यकर्ता आसमा के मकानों के कुछ हिस्से भी सरकारी जमीन की जद में पाए गए। प्रशासन ने उन्हें सख्त हिदायत दी थी कि वे स्वयं ही अपना अवैध कब्जा हटा लें। कार्रवाई के डर से गुलाम ने अपने घर के मुख्य गेट और आसमा ने घर के आगे के हिस्से को छैनी-हथौड़ी से खुद ही तोड़ना शुरू कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन को किसी भी कीमत पर अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा।
पीड़ितों का छलका दर्द: प्रधान पर गलत जमीन बेचने का लगाया आरोप
इस कार्रवाई से प्रभावित ग्रामीणों में भारी रोष और दुख है। गुलाम रसूल का कहना है कि उन्होंने यह जमीन 30 हजार रुपये में ग्राम प्रधान के चाचा से खरीदी थी और उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि यह सरकारी है। वहीं आशा कार्यकर्ता आसमा ने सवाल उठाया कि अगर यह जमीन ग्राम समाज की थी, तो प्रधानों ने 30 साल पहले इसे क्यों बेचा? उन्होंने मांग की है कि अगर उनका घर उजाड़ा जा रहा है, तो उन्हें जमीन के बदले दी गई राशि वापस मिलनी चाहिए। गरीब परिवारों का कहना है कि उनके जीवन भर की पूंजी इस घर को बनाने में लग गई थी।
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