Sambhal News: उत्तर प्रदेश के संभल और तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली से किसानों की दो अलग-अलग परेशानियां सामने आई हैं। एक तरफ जहां जंगली जानवर मेहनत की कमाई उजाड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बाजार की अस्थिरता किसानों को कर्ज के दलदल में धकेल रही है।
बंदरों को डराने के लिए किसान बने ‘भालू’
बताते चले कि, उत्तर प्रदेश के संभल जिले के फिरोजपुर गाँव में इन दिनों एक अजीब नजारा देखने को मिल रहा है। यहां के किसानों ने अपनी कीमती फसलों को बंदरों के झुंड से बचाने के लिए एक अनोखा और क्रिएटिव समाधान निकाला है। बंदरों के आतंक से तंग आकर किसान अब भालू की पोशाक पहनकर खेतों की रखवाली कर रहे हैं। किसानों का मानना है कि भालू का रूप देखकर बंदर डरकर भाग जाते हैं, जिससे उनकी फसलों को कुछ हद तक सुरक्षा मिल रही है।
आवारा पशुओं और बंदरों का कृषि पर दुष्प्रभाव
किसान धरमबीर ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि क्षेत्र में बंदरों की संख्या 100 से अधिक हो चुकी है। ये बंदर न केवल आलू बल्कि स्ट्रॉबेरी जैसी नगदी फसलों को भारी नुकसान पहुँचा रहे हैं। धरमबीर के अनुसार, “यह समस्या रोज की है। जब हम भालू बनकर खेतों में उतरते हैं, तो बंदर भाग जाते हैं, लेकिन यह सिर्फ एक अस्थायी व्यवस्था है।” फिलहाल 2-3 किसान मिलकर इस तरीके को आजमा रहे हैं, लेकिन वे सरकार से इस मुसीबत का स्थायी समाधान निकालने की गुहार लगा रहे हैं।
वन विभाग की रणनीति और वन्यजीव प्रबंधन
इस मामले पर स्थानीय वन रेंजर मनोज कुमार ने प्रतिक्रिया देते हुए स्वीकार किया कि बंदरों को केवल डराकर भगाना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि बंदर एक खेत से भागेंगे, तो वे दूसरे गाँव या खेत में जाकर उत्पात मचाएंगे। वन विभाग का मानना है कि बंदरों को पकड़ने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि उन्हें सुरक्षित रूप से जंगलों में छोड़ा जा सके। रेंजर ने भरोसा दिलाया है कि विभाग उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार बंदरों को पकड़ने का अभियान जल्द शुरू करेगा।
तमिलनाडु में आर्थिक संकट
दूसरी ओर, दक्षिण भारत के तिरुचिरापल्ली में केला उत्पादक किसान एक अलग तरह की आपदा से जूझ रहे हैं। यहां नेन्द्रन केले की कीमतों में अचानक आई गिरावट ने किसानों की कमर तोड़ दी है। भारी निवेश और कड़ी मेहनत के बाद जब फसल बाजार में पहुँची, तो दाम इतने कम मिले कि लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। इस आर्थिक मंदी के कारण किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
कृषि ऋण और किसानों की गिरवी रखी संपत्ति पर खतरा
किसान राजेंद्रन ने बताया कि स्थिति इतनी गंभीर है कि कई किसानों ने खेती के लिए अपने घर के गहने और कीमती सामान निजी बैंकों में गिरवी रखे थे। उन्हें उम्मीद थी कि फसल की बिक्री से होने वाले मुनाफे से वे अपना कर्ज चुका देंगे। लेकिन अब स्थिति यह है कि वे कर्ज का ब्याज देने में भी सक्षम नहीं हैं। उन्हें डर है कि यदि सरकार ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो वे अपनी गिरवी रखी संपत्ति कभी वापस नहीं पा सकेंगे।
सरकारी हस्तक्षेप और मुआवजे की मांग
किसानों ने तमिलनाडु सरकार से तत्काल मुआवजे की अपील की है। उनका सुझाव है कि सरकार को सीधे किसानों से केले की खरीद करनी चाहिए और उन्हें पड़ोसी राज्यों में निर्यात करना चाहिए। इससे न केवल बाजार में कीमतों को स्थिरता मिलेगी, बल्कि बिचौलियों के शोषण से भी राहत मिलेगी। किसानों का कहना है कि सरकार का दखल ही उन्हें इस वित्तीय संकट से उबार सकता है।










