Haryana News: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के कर्मचारियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा निर्णय सुनाया है। अदालत ने राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत अधीक्षकों (सुपरिंटेंडेंट्स) के बीच वेतन में किए जा रहे अंतर को असंवैधानिक करार दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जब कर्मचारी एक ही पद पर समान कार्य कर रहे हैं, तो उनके वेतनमान में भेदभाव नहीं किया जा सकता। यह निर्णय “समान कार्य के लिए समान वेतन” के सिद्धांत को मजबूती देता है।
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2018 के आदेश को दी गई चुनौती
इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने 15 अक्टूबर 2018 को जारी एक सरकारी आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश के तहत उन्हें उच्च ग्रेड पे (4800 और 5400) देने से इनकार कर दिया गया था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें भी वही वेतन लाभ मिलना चाहिए, जो अन्य प्रमुख कार्यालयों में कार्यरत अधीक्षकों को दिया जा रहा है।
समान लाभ की मांग
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से आग्रह किया कि उन्हें 2 जुलाई 2009 से समान वेतनमान का लाभ दिया जाए। उन्होंने बताया कि हरियाणा सिविल सचिवालय, एफसीआर, राज्यपाल भवन, हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC), विधानसभा और लीगल रिमेंबरेंसर कार्यालयों में तैनात अधीक्षकों को अधिक ग्रेड पे दिया जा रहा है, जबकि अन्य विभागों के अधीक्षक इससे वंचित हैं।
पुरानी व्यवस्था का हवाला
याचिकाकर्ताओं ने अपने पक्ष में यह भी दलील दी कि वर्ष 1982 में हरियाणा सरकार ने कार्यालयों की क्लास ए, बी और सी की श्रेणी समाप्त कर दी थी। इसके बाद सभी अधीक्षकों को ग्रुप बी गजटेड अधिकारी का दर्जा दिया गया था। लंबे समय तक सभी को समान वेतनमान मिलता रहा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पद और जिम्मेदारियां एक जैसी थीं।
2009 के बाद शुरू हुआ भेदभाव

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, वर्ष 2009 में अचानक कुछ चुनिंदा कार्यालयों के अधीक्षकों को अधिक ग्रेड पे देने का निर्णय लिया गया। इससे समान पद पर कार्यरत कर्मचारियों के बीच वेतन में असमानता पैदा हो गई। उन्होंने इसे अनुचित और भेदभावपूर्ण बताते हुए कोर्ट से न्याय की मांग की।
राज्य सरकार का पक्ष
वहीं, हरियाणा सरकार ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सचिवालय और अन्य महत्वपूर्ण कार्यालयों में कार्यरत अधीक्षकों का काम अधिक संवेदनशील होता है। उनका कार्य नीति निर्माण और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़ा होता है, इसलिए उन्हें अधिक वेतनमान दिया जाना उचित है।
अदालत का स्पष्ट रुख
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने यह माना कि केवल कार्यस्थल या विभाग के आधार पर वेतन में अंतर करना उचित नहीं है। अदालत ने कहा कि यदि पद, जिम्मेदारी और कार्य समान हैं, तो वेतन में अंतर संविधान के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है।
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कर्मचारियों के लिए राहत
इस फैसले से हरियाणा के विभिन्न विभागों में कार्यरत अधीक्षकों को बड़ी राहत मिली है। अब उन्हें भी समान वेतनमान मिलने का रास्ता साफ हो गया है। यह निर्णय न केवल वेतन असमानता को दूर करेगा, बल्कि सरकारी कर्मचारियों के अधिकारों को भी मजबूत करेगा।









