SP Kamal Akhtar Resign: अंदरूनी कलह बनी इस्तीफे की वजह? सपा विधायक कमाल अख्तर ने छोड़ा पद

समाजवादी पार्टी के भीतर बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है। विधायक कमाल अख्तर ने मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है। एक तरफ अखिलेश यादव का परिवार वाराणसी में जन्मदिन के जश्न और धार्मिक यात्रा में व्यस्त है, तो दूसरी तरफ पार्टी के अंदर छिड़ी अंदरूनी खींचतान ने अखिलेश की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आखिर क्यों हुआ यह बड़ा बदलाव?

SP Kamal Akhtar Resign

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 30, 2026

SP Kamal Akhtar Resign: उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर एक चौंकाने वाली हलचल देखने को मिली है। मुरादाबाद की कांठ विधानसभा सीट से विधायक और सपा के कद्दावर नेता कमाल अख्तर ने उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है। इस इस्तीफे ने राज्य की राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। हालांकि, कमाल अख्तर ने स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी नाराजगी का परिणाम नहीं है, बल्कि यह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सीधे आदेश पर उठाया गया है। उन्होंने अपने बयान में अखिलेश यादव को अपना सर्वोच्च नेता बताते हुए कहा कि उनके हर निर्देश का पालन करना उनका सर्वोपरि कर्तव्य है। इस नाटकीय इस्तीफे के बाद सपा के संगठनात्मक ढांचे में एक बार फिर मंथन का दौर शुरू हो गया है।

सांसद रुचि वीरा और विधायक के बीच आंतरिक खींचतान

इस इस्तीफे के पीछे का मुख्य कारण मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र की सांसद रुचि वीरा और विधायक कमाल अख्तर के बीच लंबे समय से चल रही तल्खियां मानी जा रही हैं। मुरादाबाद सपा इकाई में पिछले कुछ समय से भयंकर गुटबाजी और आपसी मतभेद चरम पर थे। इस अंतर्कलह ने पार्टी की छवि पर भी सवाल खड़े किए थे। विवाद इतना बढ़ गया था कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने लखनऊ में एक विशेष बैठक बुलाई, जिसमें दोनों नेता आमने-सामने थे। इस दौरान दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ गंभीर आरोप और अपनी शिकायतें आलाकमान के समक्ष रखीं। इस बैठक का उद्देश्य विवाद को समाप्त करना था, लेकिन कमाल अख्तर के हालिया फैसले ने यह सिद्ध कर दिया है कि संगठन के भीतर का अंतर्विरोध अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

सपा मुखिया के सुलह-समझौते की कोशिशें

लखनऊ में आयोजित उस हाई-प्रोफाइल बैठक में राज्यसभा सांसद जावेद अली, पूर्व विधायक यूसुफ अंसारी और जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह यादव जैसे दिग्गज मौजूद थे। उस बैठक का मकसद सपा के इन दो बड़े धड़ों के बीच उपजे असंतोष को शांत करना था। सांसद रुचि वीरा ने संगठन में अपनी अनदेखी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। उस समय ऐसा लगा था कि अखिलेश यादव ने मामले को रफा-दफा कर दिया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही रही। कमल अख्तर का इस्तीफा यह बताने के लिए पर्याप्त है कि सुलह का वह फॉर्मूला पूरी तरह कारगर साबित नहीं हुआ।

मुख्य सचेतक पद की रिक्तता

कमाल अख्तर को 28 जुलाई 2024 को मनोज कुमार पांडेय के स्थान पर मुख्य सचेतक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी। गौरतलब है कि मनोज पांडेय राज्यसभा चुनाव के दौरान बागी होकर भाजपा के खेमे में चले गए थे, जिससे यह पद खाली हुआ था। अखिलेश यादव ने कमाल अख्तर पर विश्वास जताकर उन्हें जिम्मेदारी दी थी, लेकिन महज कुछ समय बाद ही उनका इस्तीफा पार्टी के लिए एक नई चुनौती बनकर सामने आया है। अब फिर से मुख्य सचेतक का पद खाली हो गया है, जिससे सपा की रणनीतिक तैयारियों पर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। पार्टी अब इस रिक्त स्थान पर किसे बिठाएगी, यह आने वाला समय ही बताएगा।