UP Politics: सपा में छिड़ गई है ‘कोल्ड वॉर’? कमाल अख्तर के इस्तीफे के बाद रुचि वीरा का आक्रामक बयान

समाजवादी पार्टी में मचे घमासान के बीच मुरादाबाद सांसद रुचि वीरा ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने स्वीकार किया है कि विधायक कमाल अख्तर का इस्तीफा उनकी ही शिकायत का नतीजा है। अखिलेश यादव के फैसले का स्वागत करते हुए रुचि वीरा ने भाजपा पर निशाना साधा और इसे पार्टी का आंतरिक मामला बताया है।

UP Politics

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 30, 2026

UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर जारी घमासान ने नया मोड़ ले लिया है। मुरादाबाद की नवनिर्वाचित सांसद रुचि वीरा ने बिजनौर दौरे के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला और आक्रामक बयान दिया है। मुख्य सचेतक पद से विधायक कमाल अख्तर के इस्तीफे के बाद मचे सियासी बवाल के बीच, रुचि वीरा ने खुलकर स्वीकार किया है कि इस घटनाक्रम के पीछे उन्हीं की शिकायत थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात कर स्थानीय स्तर पर चल रही गुटबाजी और उन्हें दरकिनार किए जाने की गंभीर शिकायत दर्ज कराई थी। रुचि वीरा ने इस इस्तीफे को पार्टी आलाकमान द्वारा लिया गया एक ‘उचित और त्वरित अनुशासनात्मक कदम’ करार दिया है।

अखिलेश यादव का आभार व्यक्त किया

बताते चले कि, इस विवादित मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए रुचि वीरा ने समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उनकी शिकायतों को न केवल गंभीरता से सुना, बल्कि उस पर तत्काल कार्रवाई भी की। रुचि वीरा ने भावुक स्वर में कहा, “अखिलेश यादव जी हमेशा महिलाओं का सम्मान करते हैं। उन्होंने पार्टी संगठन के भीतर एक महिला जनप्रतिनिधि की गरिमा और मान-सम्मान को बरकरार रखा है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अखिलेश यादव ने जिस तरह से इस आंतरिक मुद्दे को सुलझाया है, वह पार्टी के प्रति उनके समर्पण और अनुशासन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह बयान यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि पार्टी नेतृत्व अब संगठन में किसी भी प्रकार की गुटबाजी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

भाजपा पर तीखा पलटवार

सपा की इस आंतरिक फूट को लेकर विपक्षी दलों, विशेषकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा की जा रही घेराबंदी का रुचि वीरा ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि वे इस मामूली संगठनात्मक मुद्दे को बेवजह तूल देने और राजनीतिक हवा देने की कोशिश कर रहे हैं। रुचि वीरा ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह पूरी तरह से समाजवादी पार्टी का ‘घर का मामला’ है। उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी बड़े राजनीतिक परिवार या संगठन के भीतर वैचारिक मतभेद या शिकायतें होना स्वाभाविक है, जिसे शीर्ष नेतृत्व द्वारा बैठकर सुलझा लिया जाता है। उन्होंने विपक्षी दलों को चेतावनी दी कि उन्हें सपा के आंतरिक कामकाज में राजनीति ढूंढने की आवश्यकता नहीं है।

संगठनात्मक एक्शन का संकेत

सांसद रुचि वीरा के इस ताजा बयान ने उत्तर प्रदेश की सियासत में यह स्पष्ट कर दिया है कि कमाल अख्तर का इस्तीफा कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि यह पूरी तरह से रुचि वीरा की शिकायत का परिणाम था। सपा नेतृत्व ने जिस तेजी से इस मामले में कदम उठाया है, वह पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखने के कड़े इरादों को दर्शाता है। बिजनौर और मुरादाबाद क्षेत्र में सपा की गुटबाजी को समाप्त करने के लिए अखिलेश यादव ने एक कड़ा संदेश दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस इस्तीफे के बाद पार्टी के भीतर और किन बड़े बदलावों की पटकथा लिखी जाती है, क्योंकि रुचि वीरा का यह रुख आने वाले समय में सपा की स्थानीय राजनीति को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।