Delhi News: दक्षिण दिल्ली के सैदुल अजाब इलाके में 30 मई को गिरी पांच मंजिला इमारत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी, वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट में दिल्ली नगर निगम (MCD) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 6 लोगों की जान लेने वाली यह त्रासदी वर्षों से चल रही प्रशासनिक लापरवाही और बिल्डिंग नियमों के उल्लंघन का सीधा परिणाम है।
तीन चरणों में पनपा अवैध निर्माण और निगम की चुप्पी
रिपोर्ट के मुताबिक, यह अवैध निर्माण एक बार में नहीं, बल्कि तीन चरणों में हुआ। पहली बार 2012 में बेसमेंट, ग्राउंड और पहली मंजिल पर बिना मंजूरी के निर्माण का मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद 2015 में दूसरी और तीसरी मंजिल का अवैध निर्माण सामने आया। हाल के महीनों में चौथी और पांचवीं मंजिल को भी अवैध तरीके से जोड़ दिया गया। एमिकस का कहना है कि 2015 में केस दर्ज होने के बाद भी MCD ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, न ही जगह को सील किया, जिससे अवैध निर्माण को फलीभूत होने का मौका मिला।
अवैध निर्माण के जाल में उलझा कानूनी संघर्ष
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, यह मामला कई बार दिल्ली हाईकोर्ट भी पहुंचा। दिसंबर 2020 में बिल्डिंग मालिक ने कोर्ट से संरक्षण ले लिया था। बाद में एक अन्य याचिका में निगम अधिकारियों पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया गया, जिस पर निगम ने कोर्ट को आश्वासन दिया था कि वह नियमों के अनुसार कार्रवाई करेगा। रिपोर्ट में खुलासा किया गया कि अप्रैल 2026 में जब एक याचिका दायर कर चल रहे अवैध निर्माण के खिलाफ दखल मांगा गया, तो MCD के वकील ने कोर्ट में झूठ बोला कि उस प्रॉपर्टी पर कोई निर्माण कार्य नहीं हो रहा है। इस झूठे बयान के कारण याचिका खारिज कर दी गई।
प्रशासनिक जवाबदेही और दिखावटी निलंबन पर प्रहार
हादसे के बाद MCD ने एक असिस्टेंट इंजीनियर और एक जूनियर इंजीनियर को निलंबित किया है। लेकिन एमिकस क्यूरी ने इसे केवल एक ‘दिखावटी कार्रवाई’ बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जवाबदेही महज छोटे स्तर के सस्पेंशन से कहीं ऊपर होनी चाहिए। यह स्पष्ट है कि बिना उच्च अधिकारियों की मिलीभगत के सालों तक पांच मंजिला अवैध इमारत का खड़ा रहना असंभव था।
सुप्रीम कोर्ट में मुआवजे और जवाबदेही की माँग
एमिकस ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह MCD को फटकार लगाए और उन अधिकारियों की पहचान करे जिनकी शह पर यह अवैध ढांचा खड़ा हुआ। साथ ही, पूरी दिल्ली में स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने, सैदुल अजाब मामले में विस्तृत ‘एक्शन-टेकन रिपोर्ट’ (ATR) पेश करने और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई है।
सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर पर हाईकोर्ट की सख्त कार्रवाई
दूसरी ओर, इस मामले को लेकर गलत सूचना और भ्रामक आरोप फैलाने के आरोप में दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया इंफ्लएंसर कपिल कक्कड़ को अवमानना का नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वे उन वीडियो को हटाएँ जिनमें कोर्ट पर साकेत बिल्डिंग के अवैध निर्माण को समर्थन देने के निराधार आरोप लगाए गए थे। गूगल, यूट्यूब और मेटा ने कोर्ट को आश्वासन दिया है कि URL साझा किए जाने पर वे इन आपत्तिजनक वीडियो को हटा देंगे।










