Sakat Chauth 2026: कब है सकट चौथ व्रत? एक क्लिक में जानें तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि

सकट चौथ, जिसे तिल चौथ भी कहा जाता है, माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। साल 2026 में यह व्रत जनवरी की शुरुआत में ही रखा जाएगा।

Sakat Chauth 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जनवरी 3, 2026

Sakat Chauth 2026: सनातन धर्म में कई सारे व्रत त्योहार पड़ते हैं, और सभी का अपना महत्व भी होता है। लेकिन सकट चौथ व्रत को बेहद ही खास माना गया है, जो कि हर साल माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। यह व्रत संतान की सुरक्षा, सुख समृद्धि और परिवार के कल्याण के लिए किया जाता है। इस पावन दिन भक्त भगवान श्री गणेश की विधिवत पूजा करते हैं और उन्हें तिलकुट का भोग चढ़ाते हैं। इसी कारण इस व्रत को तिलकुट चतुर्थी या ति​ल चौथ भी कहा जाता है। साथ ही इसे माघ संकष्टी चतुर्थी के नाम से भी जानते हैं। ऐसे में हम आपको सकट चौथ की तारीख और इससे जुड़ी जानकारी प्रदान कर रहे हैं, तो आइए जानते हैं।

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सकट चौथ की तारीख

Sakat Chauth 2026
कब है सकट चौथ व्रत?

जानकारी के अनुसार इस बार माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 6 जनवरी, मंगलवार की सुबह 8 बजकर 1 मिनट से आरंभ हो रही है जो कि 7 जनवरी दिन बुधवार की सुबह 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। चतुर्थी तिथि का चंद्रोदय 6 जनवरी दिन मंगलवार को होगा। इसलिए इसी दिन सकट चौथ का व्रत किया जाएगा। इस दिन प्रीति, आयुष्मान, आनंद और सर्वार्थसिद्धि नाम के कई शुभ योग बन रहे हैं। जिसके चलते इसका महत्व और बढ़ गया है।

सकट चौथ व्रत की विधि

Sakat Chauth 2026
कब है सकट चौथ व्रत?

बता दें कि सकट चौथ व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। इसके बाद साफ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प करें। अब दिनभर निर्जला व्रत रखें और अगर बिना पानी के व्रत रह पाना संभव नहीं है तो आप फलाहार व्रत रखें। इस व्रत में भगवान श्री गणेश की पूजा करें। पूजा के समय सकट व्रत की कथा जरूर सुनें। पूजा में भगवान गणेश को तिल, गुड़ और तिल से बने लड्डू का भोग जरूर लगाएं। भगवान के बाद चंद्र देव की पूजा भी करें। व्रत का पारण चंद्रमा को जल देने के बाद ही करना चाहिए। माना जाता है कि इस विधि से पूजा करने से व्रत का पूर्ण फल की प्राप्ति होती है और कष्टों का निवारण हो जाता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।