उलूर-सांड्रा के जंगलों में सफारी शुरू, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

बीजापुर. चार दशक तक जिस जंगल में दाखिल होने से पहले नक्सलियों की इजाजत और निगरानी का सामना करना पड़ता था, अब वहां पर्यटक जंगल की खूबसूरती देखने पहुंचेंगे। बीजापुर के भोपालपटनम ब्लॉक का उलूर-सांड्रा इलाका अब पर्यटन के नए नक्शे पर उभर रहा है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व के इस हिस्से में 1 नवंबर से जंगल सफारी की शुरुआत हो चुकी है। कभी नक्सलियों के नाके और उनकी गतिविधियों के कारण यह इलाका आम लोगों की पहुंच से दूर था। डीवीसी मेंबर हूंगा और नागेश की सक्रियता वाले इस क्षेत्र में सुरक्षा बलों के लिए भी आवाजाही आसान नहीं थी।

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Published On :

नवम्बर 4, 2026

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बीजापुर.

चार दशक तक जिस जंगल में दाखिल होने से पहले नक्सलियों की इजाजत और निगरानी का सामना करना पड़ता था, अब वहां पर्यटक जंगल की खूबसूरती देखने पहुंचेंगे। बीजापुर के भोपालपटनम ब्लॉक का उलूर-सांड्रा इलाका अब पर्यटन के नए नक्शे पर उभर रहा है।

इंद्रावती टाइगर रिजर्व के इस हिस्से में 1 नवंबर से जंगल सफारी की शुरुआत हो चुकी है। कभी नक्सलियों के नाके और उनकी गतिविधियों के कारण यह इलाका आम लोगों की पहुंच से दूर था। डीवीसी मेंबर हूंगा और नागेश की सक्रियता वाले इस क्षेत्र में सुरक्षा बलों के लिए भी आवाजाही आसान नहीं थी। अब बदले सुरक्षा हालात के बीच वन विभाग ने इस जंगल को पर्यटन से जोड़ने की पहल की है। 2,799.07 वर्ग किलोमीटर में फैले इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघ, तेंदुआ, जंगली भैंसा, गौर, सांभर और भालू जैसे वन्यजीव मौजूद हैं। शुरुआती चरण में उल्लूर गांव से दंडापार्टी तक करीब 9 किलोमीटर के रूट पर चार जिप्सियों से सफारी कराई जा रही है।

वन विभाग ने बफर क्षेत्र में करीब 33 किलोमीटर का सफारी रूट चिह्नित किया है, जहां प्रति वाहन प्रतिदिन 2 हजार रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है। स्थानीय छह युवाओं को गाइड और वाहन चालक के रूप में प्रशिक्षित किया गया है, जिससे रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। अब सबसे बड़ी चुनौती पर्यटन के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण को मजबूत करने की होगी। कभी नक्सलियों के नियंत्रण की पहचान रहा उलूर-सांड्रा अब बस्तर में बदलते हालात और पर्यटन की नई संभावनाओं की कहानी लिखने जा रहा है।

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