West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगी है। दक्षिण कोलकाता के जादवपुर इलाके के गार्फा में स्थित उस पार्टी कार्यालय पर TMC समर्थकों ने ताला लगा दिया, जिसका इस्तेमाल जादवपुर की सांसद सायनी घोष अपने संसदीय और संगठनात्मक कामकाज के लिए करती थीं। घटना के बाद इलाके में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है।
‘गद्दारों के लिए कोई जगह नहीं’ के पोस्टर से बढ़ा विवाद
बताते चले कि, वार्ड 106 में हुई इस कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में आक्रोशित समर्थक पार्टी कार्यालय के बाहर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय के आसपास बड़े-बड़े बैनर और पोस्टर लगाए। इन पोस्टरों पर कथित तौर पर लिखा था- ‘गद्दारों के लिए कोई जगह नहीं’। इसके साथ ही समर्थकों ने सायनी घोष की राजनीतिक स्थिति और पार्टी से उनके अलग होने को लेकर सवाल उठाए।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि 2024 के लोकसभा चुनाव में जादवपुर से TMC के टिकट पर जीत हासिल करने वाली सायनी घोष अब पार्टी से अलग रास्ता अपना चुकी हैं। समर्थकों ने सवाल किया कि यदि सांसद ने पार्टी से अलग राजनीतिक राह चुन ली है, तो फिर TMC के कार्यालय और अन्य पार्टी सुविधाओं का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।
सायनी घोष के सेक्रेटरी को कार्यालय खाली करने को कहा
जानकारी के मुताबिक, जब प्रदर्शनकारी गार्फा स्थित पार्टी कार्यालय पहुंचे, उस समय वहां सायनी घोष के सेक्रेटरी मौजूद थे। प्रदर्शनकारियों ने उनसे तत्काल कार्यालय खाली करने के लिए कहा। सेक्रेटरी के बाहर निकलने के बाद समर्थकों ने कार्यालय के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया। बताया जाता है कि सांसद बनने के बाद से सायनी घोष इस कार्यालय का इस्तेमाल स्थानीय लोगों से मुलाकात, संगठनात्मक बैठकों और अपने संसदीय क्षेत्र से जुड़े कार्यों के लिए करती रही थीं। ऐसे में कार्यालय पर ताला लगाए जाने की घटना ने TMC के अंदर चल रहे मतभेद को और ज्यादा उजागर कर दिया है।
TMC और सायनी घोष के बीच बढ़ी राजनीतिक दूरी
सायनी घोष के राजनीतिक रुख में बदलाव के बाद TMC समर्थकों और उनके बीच दूरी बढ़ती नजर आ रही है। पार्टी कार्यालय पर हुई कार्रवाई को इसी राजनीतिक टकराव की एक अहम कड़ी माना जा रहा है। समर्थकों का कहना है कि पार्टी छोड़ने के बाद किसी नेता को TMC के संगठनात्मक संसाधनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
वहीं, इस घटनाक्रम के बाद जादवपुर क्षेत्र में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। पार्टी कार्यालय पर ताला लगाने और विरोध में पोस्टर लगाए जाने से स्थानीय स्तर पर भी इस विवाद को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
कौन हैं सायनी घोष?
सायनी घोष बंगाली फिल्म और टेलीविजन जगत की जानी-मानी अभिनेत्री रही हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मनोरंजन जगत से की और बंगाली टेलीविजन तथा फिल्मों में काम करके अपनी पहचान बनाई। अभिनय के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और वर्ष 2021 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुईं।
सायनी घोष का TMC से जादवपुर सांसद बनने तक का सफर
राजनीति में आने के बाद सायनी घोष को युवा तृणमूल कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। इस भूमिका में उन्होंने युवाओं के बीच पार्टी की पहुंच मजबूत करने की कोशिश की। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में TMC ने उन्हें जादवपुर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया, जहां उन्होंने जीत हासिल कर संसद में प्रवेश किया।
हालांकि बाद के राजनीतिक घटनाक्रम में सायनी घोष ने TMC से अलग होकर नेशनल कांग्रेस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का दामन थाम लिया। इसके साथ ही उनके NDA गठबंधन के साथ जाने की बात भी सामने आई। इसी राजनीतिक बदलाव के बाद अब TMC समर्थकों ने उनके पुराने पार्टी कार्यालय के इस्तेमाल पर सवाल खड़े किए हैं।
जादवपुर में TMC की अंदरूनी कलह ने बढ़ाई सियासी हलचल
सायनी घोष के कार्यालय पर ताला लगाए जाने की घटना ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। एक ओर समर्थक पार्टी से अलग हुए नेताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस तरह की कार्रवाई ने TMC के भीतर चल रहे राजनीतिक मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया है। जादवपुर में यह विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।










