Russian Oil Tankers: रूस से भारत आ रहे तेल टैंकर, चीन का रास्ता छोड़ भारतीय बंदरगाहों की ओर मुड़े जहाज

ग्लोबल एनर्जी मार्केट में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। चीन के बंदरगाहों के लिए निकले कम से कम सात रूसी तेल टैंकरों ने बीच रास्ते में अपना रुख भारत की ओर मोड़ लिया है। अमेरिकी प्रशासन से मिली विशेष छूट के बाद भारतीय रिफाइनर्स ने रिकॉर्ड 3 करोड़ बैरल तेल खरीदा है। क्या यह चीन-रूस संबंधों में नई दरार है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 18, 2026

Russian Oil Tankers: वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिल रहा है, जहाँ रूसी कच्चे तेल से लदे विशाल टैंकरों ने अपना रास्ता बदल लिया है। शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, चीन के रिझाओ बंदरगाह की ओर जा रहे कई रूसी टैंकर अब अचानक यू-टर्न लेकर भारत की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब नई दिल्ली ने मॉस्को से कच्चे तेल के आयात में भारी बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। दक्षिण चीन सागर के जलक्षेत्र से जहाजों का इस तरह भारत की ओर मुड़ना वैश्विक राजनीति और तेल व्यापार के बदलते समीकरणों की ओर स्पष्ट इशारा कर रहा है।

‘एक्वा टाइटन’ का यू-टर्न: चीन के बदले अब न्यू मैंगलोर पोर्ट होगा गंतव्य

रूसी तेल लेकर आ रहा ‘एक्वा टाइटन’ नामक अफ्रामैक्स जहाज इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है। इस जहाज ने जनवरी के अंत में बाल्टिक सागर के एक बंदरगाह से कच्चा तेल लोड किया था और शुरुआत में इसका गंतव्य चीन का रिझाओ बंदरगाह निर्धारित था। हालांकि, मार्च के मध्य में दक्षिण-पूर्वी एशियाई जल क्षेत्र में पहुँचते ही इस जहाज ने अपना रास्ता बदल लिया। अब ताजा आंकड़ों के अनुसार, यह टैंकर 21 मार्च 2026 को भारत के न्यू मैंगलोर बंदरगाह पहुँचने वाला है। यह घटना दर्शाती है कि भारतीय रिफाइनर अब रूसी तेल को लेकर बेहद सक्रिय हो गए हैं।

अमेरिका का बदला रुख: भारत ने खरीदे 30 मिलियन बैरल रूसी तेल

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिका के रुख में आया बदलाव माना जा रहा है। हाल के हफ्तों में अमेरिका ने भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद बढ़ाने पर अपनी मौन सहमति या रणनीतिक लचीलापन दिखाया है। इसके तुरंत बाद, भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने आक्रामक रुख अपनाते हुए रूस से लगभग 30 मिलियन बैरल कच्चे तेल का सौदा किया है। भारत का यह कदम ईरान युद्ध के कारण मध्य-पूर्व (मिडल ईस्ट) से तेल की आपूर्ति में आई संभावित कमी और बढ़ती कीमतों से निपटने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

चीन को पछाड़ भारत फिर बना शीर्ष खरीदार: टैंकरों की कतार लगी

पिछले कुछ महीनों में जब भारत ने तकनीकी और भुगतान संबंधी कारणों से रूस से खरीद कम की थी, तब चीन रूस के लिए सबसे बड़े खरीदार के रूप में उभरा था। लेकिन अब पासा पलटता दिख रहा है। वॉर्टेक्सा लिमिटेड की रिपोर्ट के अनुसार, रूसी तेल ले जा रहे कम से कम 7 बड़े टैंकरों ने अपनी यात्रा के बीच में ही चीन के बजाय भारत को अपना नया गंतव्य बना लिया है। भारत के सभी प्रमुख सरकारी और निजी रिफाइनर अब बाजार में लौट आए हैं, जिससे रूसी कच्चे तेल की मांग में जबरदस्त उछाल आया है।

‘स्वेजमैक्स ज़ूज़ू एन.’ की भारत वापसी: सिक्का बंदरगाह पर मचेगी हलचल

जहाज-ट्रैकिंग डेटा का विश्लेषण करने वाली संस्था Kpler के अनुसार, एक और महत्वपूर्ण टैंकर ‘स्वेजमैक्स ज़ूज़ू एन.’ भी भारत की ओर बढ़ रहा है। इसमें कजाख सीपीसी (CPC) ब्लेंड कच्चा तेल भरा है। यह जहाज रूस के काला सागर स्थित नोवोरोस्सिय्स्क बंदरगाह से रवाना होकर चीन के करीब रिझाओ तक पहुँच गया था, लेकिन मार्च की शुरुआत में ही इसने अपना रुख बदल लिया। अब यह 25 मार्च 2026 को गुजरात के सिक्का बंदरगाह पर लंगर डालने वाला है। इन जहाजों की भारत वापसी से देश के ऊर्जा भंडार को मजबूती मिलेगी।

निष्कर्ष: ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में भारत का कूटनीतिक संतुलन

जापान और दक्षिण कोरिया जैसे अन्य एशियाई खरीदारों के भी रूसी बाजार में वापस आने की संभावनाओं के बीच तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है। ऐसी स्थिति में भारत द्वारा समय रहते भारी मात्रा में तेल सुरक्षित करना एक बुद्धिमानी भरा कदम है। चीन से तेल टैंकरों का भारत की ओर मुड़ना यह साबित करता है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की क्रय शक्ति और कूटनीतिक स्थिति कितनी सुदृढ़ हो चुकी है। यह न केवल घरेलू ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद करेगा, बल्कि आने वाले संकटपूर्ण समय में ऊर्जा सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा।

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