Russian Oil Tanker: उत्तरी अटलांटिक और कैरिबियन सागर के जलक्षेत्र में एक बार फिर शीत युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक बड़े सैन्य और कानून प्रवर्तन अभियान के तहत वेनेजुएला से जुड़े दो प्रतिबंधित तेल टैंकरों को जब्त कर लिया है। इन जहाजों पर अमेरिकी प्रतिबंधों के उल्लंघन और अवैध तेल तस्करी का आरोप है। इस कार्रवाई ने वाशिंगटन और मॉस्को के बीच कूटनीतिक संबंधों में और कड़वाहट पैदा कर दी है, क्योंकि जब्त किए गए जहाजों में से एक रूसी ध्वज के तहत संचालित हो रहा था।
उत्तरी अटलांटिक में ‘बेला 1’ का पीछा और नाटकीय जब्ती
अमेरिकी यूरोपीय कमान ने घोषणा की कि उन्होंने व्यापारिक पोत ‘बेला 1’ (Bella 1) को स्कॉटलैंड और आइसलैंड के बीच के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सफलतापूर्वक जब्त कर लिया है। अमेरिकी तटरक्षक बल (Coast Guard) के एक कटर ने इस टैंकर का कई दिनों तक पीछा किया। बताया जा रहा है कि यह जहाज वेनेजुएला के आसपास लगाई गई अमेरिकी नाकाबंदी से बचने की कोशिश कर रहा था। यूरोप की ओर रुख करने के बाद, इस जहाज ने अपनी पहचान छिपाने के लिए नाम बदलकर ‘मरीनरा’ (Marinera) कर लिया था और इसे रूसी ध्वज के तहत पंजीकृत कराया गया था।
कैरिबियन में दूसरे टैंकर ‘सोफिया’ पर अमेरिकी नियंत्रण
एक ओर जहां उत्तरी अटलांटिक में ऑपरेशन चल रहा था, वहीं दूसरी ओर कैरिबियन सागर में भी अमेरिकी सेना सक्रिय थी। गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम ने सोशल मीडिया पर पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने टैंकर ‘सोफिया’ को भी अपने नियंत्रण में ले लिया है। नोएम के अनुसार, ये दोनों जहाज या तो वेनेजुएला से तेल लेकर निकले थे या वहां की ओर जा रहे थे। अमेरिका का आरोप है कि ये जहाज उन कंपनियों के लिए काम कर रहे थे, जिनका संबंध लेबनानी समूह हिज़्बुल्लाह जैसे प्रतिबंधित संगठनों से है।
रूसी पनडुब्बी और युद्धपोतों की मौजूदगी के बीच ऑपरेशन
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ‘मरीनरा’ को जब्त करने का यह ऑपरेशन बेहद संवेदनशील था क्योंकि जब अमेरिकी सेना ने इस जहाज को घेरा, तब पास ही में एक रूसी पनडुब्बी और युद्धपोत भी तैनात थे। लगभग दो सप्ताह तक चले इस लंबे पीछा करने के अभियान के बाद अंततः बुधवार को अमेरिकी सेना ने जहाज पर कब्जा कर लिया और इसका नियंत्रण कानून प्रवर्तन अधिकारियों को सौंप दिया। अधिकारियों का कहना है कि यह जहाज 2024 से ही अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में शामिल था।
रूस की कड़ी प्रतिक्रिया: अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का आरोप
रूसी विदेश मंत्रालय और परिवहन मंत्रालय ने इस जब्ती पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। रूसी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिकी तटरक्षक बल का जहाज उनके टैंकर का तब से पीछा कर रहा था जब वह अमेरिकी तट से 4,000 किलोमीटर दूर था। रूस के परिवहन मंत्रालय के अनुसार, मरीनरा के पास रूसी ध्वज फहराने का वैध और अस्थायी परमिट था। मॉस्को ने इसे “समुद्री डकैती” के समान बताते हुए कहा कि किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अन्य देश के पंजीकृत जहाज के खिलाफ बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं है।
संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून और भविष्य का संकट
रूस ने 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) का हवाला देते हुए अमेरिका की इस कार्रवाई को अवैध करार दिया है। रूस का दावा है कि जहाज से उनका संपर्क टूट गया है और यह “क्षेत्रीय जलक्षेत्र के बाहर” की गई एक जबरन कार्रवाई है। दूसरी तरफ, अमेरिका अपनी ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति के तहत वेनेजुएला और उसके सहयोगियों की आर्थिक कमर तोड़ने पर अड़ा है। इस घटना ने न केवल तेल बाजार में हलचल मचा दी है, बल्कि अटलांटिक महासागर में सैन्य टकराव की आशंकाओं को भी बल दिया है।
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