Russia-Ukraine War 4 Years: रूस-यूक्रेन युद्ध के चार साल, पुतिन ने बताया क्यों जरूरी है यह ऐतिहासिक महासंग्राम

Russia-Ukraine War: युद्ध के 1,461 दिन बीतने के बाद भी पुतिन पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। चौथी बरसी पर पुतिन ने इस संघर्ष को रूस के लिए 'ऐतिहासिक रूप से अनिवार्य' बताते हुए पश्चिम को खुली चुनौती दी है। आखिर क्या है वह सच जो पुतिन इस महायुद्ध के पीछे छिपा रहे हैं?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 24, 2026

Russia-Ukraine War 4 Years: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे सैन्य संघर्ष को आज पूरे चार साल बीत चुके हैं। इस ऐतिहासिक और चुनौतीपूर्ण अवसर पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने राष्ट्र के नाम एक विशेष संबोधन जारी किया है। पुतिन ने वैश्विक समुदाय को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि रूस यह युद्ध किसी क्षेत्र विस्तार या विस्तारवाद की नीति के तहत नहीं लड़ रहा है। उनके अनुसार, यह संघर्ष रूस की राष्ट्रीय संप्रभुता, अखंडता और आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व को बचाने के लिए एक अनिवार्य कदम है। पुतिन ने जोर देकर कहा कि रूस के खिलाफ रची जा रही साजिशों को विफल करना ही इस ‘विशेष सैन्य अभियान’ का मुख्य उद्देश्य है।

मिसाइल फैक्ट्री पर हमला और बढ़ती चुनौतियां: 2022 से अब तक का सफर

24 फरवरी 2022 को शुरू हुआ यह सैन्य अभियान अब अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इन चार वर्षों में रूस को कई कूटनीतिक और सामरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। हाल ही में वोतकिंस्क स्थित एक प्रमुख मिसाइल फैक्ट्री पर हुए हमले ने रूसी सुरक्षा तंत्र की चिंता बढ़ा दी है। सोमवार को सैनिकों को संबोधित करते हुए पुतिन ने स्वीकार किया कि संघर्ष लंबा और कठिन है, लेकिन उन्होंने विश्वास दिलाया कि रूस अपनी सच्चाई और आजादी की रक्षा के लिए अंत तक लड़ेगा। उन्होंने इस युद्ध को न्याय और वैश्विक संतुलन के लिए एक निर्णायक मोड़ बताया।

पितृभूमि रक्षक दिवस: वीर सैनिकों का सम्मान और पूर्वजों की परंपरा

रूस में 23 फरवरी को ‘पितृभूमि रक्षक दिवस’ (Defender of the Fatherland Day) के रूप में बड़े गौरव के साथ मनाया जाता है। इस खास मौके पर राष्ट्रपति पुतिन ने अग्रिम पंक्ति (फ्रंटलाइन) पर तैनात जांबाज सैनिकों और अधिकारियों को ‘गोल्ड स्टार’ पदक से सम्मानित किया। सैनिकों की वीरता की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान सेना अपने पूर्वजों की महान युद्ध परंपराओं को निभा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सेना ही नहीं, बल्कि नेशनल गार्ड और आंतरिक मंत्रालय के कर्मचारी भी इस रक्षा अभियान में रीढ़ की हड्डी की तरह काम कर रहे हैं।

सेना का आधुनिकीकरण: उन्नत सैन्य तकनीक और उद्योग पर भरोसा

पुतिन ने अपने संबोधन में रूसी सेना और नौसेना को विश्व की सबसे आधुनिक शक्ति बनाने का दृढ़ संकल्प दोहराया। उन्होंने घोषणा की कि पिछले चार वर्षों के युद्ध अनुभवों का बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है और इसी के आधार पर भविष्य की सैन्य तकनीक को विकसित किया जाएगा। रूस अपने विज्ञान और रक्षा उद्योग क्षेत्र की कंपनियों की क्षमताओं का अधिकतम उपयोग करेगा ताकि युद्ध के मैदान में रूसी हथियारों की श्रेष्ठता बनी रहे। इसमें आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस और गाइडेड मिसाइल प्रणालियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

परमाणु त्रयी का विकास: वैश्विक शक्ति संतुलन की सबसे बड़ी गारंटी

रूस की सुरक्षा रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उसकी परमाणु क्षमता है। पुतिन ने स्पष्ट किया कि ‘परमाणु त्रयी’ (जमीनी, हवाई और समुद्री परमाणु हथियार) का विकास और आधुनिकीकरण रूस की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी। उनके अनुसार, यह न केवल रूस की सुरक्षा की गारंटी है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन को बनाए रखने और पश्चिमी देशों के रणनीतिक दबाव को रोकने के लिए भी आवश्यक है। रूस अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को इतना घातक बनाएगा कि कोई भी शत्रु देश उस पर हमला करने का दुस्साहस न कर सके।

झुकेगा नहीं रूस: राष्ट्रीय हितों की रक्षा का अटूट संकल्प

संबोधन के समापन पर पुतिन ने दुनिया को यह कड़ा संदेश दिया कि रूस किसी भी दबाव में पीछे नहीं हटने वाला है। उन्होंने कहा कि रूस अपने राष्ट्रीय हितों और अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। 23 फरवरी का यह समारोह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि रूसी संकल्प का प्रदर्शन था। राष्ट्रपति ने अंत में कहा कि रूस नई वैश्विक व्यवस्था की चुनौतियों के अनुरूप अपने सशस्त्र बलों को तैयार कर चुका है और वह एक न्यायपूर्ण भविष्य सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाता रहेगा।

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