Russia Ukraine War 2026 : रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा संघर्ष अब अपने सबसे आक्रामक और विनाशकारी चरण में पहुँच गया है। हाल के दिनों में रूसी सेना ने यूक्रेन के विभिन्न शहरों और ऊर्जा केंद्रों पर मिसाइलों और ड्रोनों की झड़ी लगा दी है। रूस के इस बढ़ते आक्रामक रुख ने वैश्विक शक्तियों को चिंता में डाल दिया है। विशेष रूप से अमेरिका ने रूस पर इस युद्ध को “खतरनाक तरीके से” भड़काने और विस्तारित करने का गंभीर आरोप लगाया है। यह तनावपूर्ण स्थिति तब पैदा हुई है जब वाशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन दोनों देशों के बीच शांति वार्ता की संभावनाओं को तलाशने की कोशिश कर रहा है।
यूएन सुरक्षा परिषद की आपात बैठक: अमेरिका का कड़ा विरोध
रूस की ओर से किए गए हालिया हमलों के बाद यूक्रेन की मांग पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई। इस बैठक में अमेरिका की उप राजदूत टैमी ब्रूस ने रूस की युद्ध नीति की कड़े शब्दों में निंदा की। अमेरिका ने विशेष रूप से पोलैंड (जो एक नाटो सदस्य है) की सीमा के पास रूसी मिसाइल दागने की घटना पर गहरी आपत्ति जताई। ब्रूस ने कहा कि अमेरिका इस अनावश्यक संघर्ष में हो रही अनगिनत मौतों और मानवीय संकट पर गहरा खेद व्यक्त करता है और रूस की इस अनियंत्रित आक्रामकता को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
ओरेश्निक मिसाइल का उपयोग: नाटो देशों के लिए गंभीर चेतावनी
इस पूरी बहस के केंद्र में रूस की नई और शक्तिशाली ‘ओरेश्निक’ (Oreshnik) मिसाइल है। यह परमाणु क्षमता से लैस एक ऐसी मिसाइल है जिसने युद्ध के मैदान में रूस की ताकत का प्रदर्शन किया है। हाल ही में यूक्रेन पर किए गए हमलों में दर्जनों मिसाइलों के साथ ओरेश्निक का इस्तेमाल किया गया। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस मिसाइल का प्रक्षेपण केवल यूक्रेन के लिए नहीं, बल्कि नाटो (NATO) सहयोगियों के लिए एक सीधा संदेश और खुली चेतावनी है। रूस यह दिखाना चाहता है कि वह अपनी सीमाओं के पास किसी भी पश्चिमी हस्तक्षेप का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
यूक्रेन के बुनियादी ढांचों पर हमला: ऊर्जा संकट गहराया
रूस ने अपनी रणनीति बदलते हुए यूक्रेन के ऊर्जा और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों (Infrastructure) को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। भीषण सर्दियों के मौसम में बिजली घरों और पानी की आपूर्ति प्रणालियों पर हमले से आम जनता के सामने जीवन का संकट खड़ा हो गया है। टैमी ब्रूस ने सुरक्षा परिषद में स्पष्ट किया कि नागरिक ठिकानों को जानबूझकर नष्ट करना युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है। अमेरिका का मानना है कि रूस इन हमलों के जरिए यूक्रेन के मनोबल को तोड़ना चाहता है ताकि वह बातचीत की मेज पर झुकने को मजबूर हो जाए।
यूरोपीय नेताओं की प्रतिक्रिया: “अस्वीकार्य और भड़काने वाला कृत्य”
रूस के इस व्यवहार पर केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरा यूरोप एकजुट नजर आ रहा है। यूरोपीय नेताओं ने ओरेश्निक मिसाइल के उपयोग को “अत्यधिक भड़काने वाला और पूरी तरह से अस्वीकार्य” करार दिया है। नाटो के सदस्य देशों का कहना है कि रूस जानबूझकर संघर्ष के दायरे को बढ़ा रहा है ताकि वैश्विक स्तर पर डर पैदा किया जा सके। ट्रंप प्रशासन के शांति प्रयासों के बीच रूस की यह कार्रवाई कूटनीतिक रास्तों को और अधिक कठिन बना रही है।
शांति वार्ता की राह में बढ़ती चुनौतियां
भविष्य की ओर देखें तो शांति की संभावनाएं फिलहाल धुंधली नजर आ रही हैं। एक तरफ ट्रंप प्रशासन रूस और यूक्रेन को मेज पर लाने की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ जमीन पर मिसाइलों की गूंज बढ़ती जा रही है। सुरक्षा परिषद की बैठक में हुई बहस यह दर्शाती है कि रूस और पश्चिमी देशों के बीच विश्वास की कमी अपने चरम पर है। जब तक ओरेश्निक जैसी घातक मिसाइलों का उपयोग और नागरिक ठिकानों पर हमले नहीं रुकते, तब तक किसी भी शांति समझौते की उम्मीद करना बेमानी होगा।
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