Middle East War: ईरान पर हमले से भड़का रूस, पुतिन की अमेरिका-इजरायल को खुली चुनौती- ‘परिणाम भुगतने को रहें तैयार’

ईरान पर इजरायल और अमेरिका के 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चुप्पी तोड़ी है। क्रेमलिन ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए तेहरान को "हर संभव सैन्य मदद" देने का संकेत दिया है। क्या रूस के इस कदम से यह क्षेत्रीय जंग अब वैश्विक परमाणु युद्ध में बदल जाएगी?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 28, 2026

Middle East War: शनिवार को इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त सैन्य हमले ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इस हमले के बाद मध्य पूर्व में युद्ध की लपटें तेज हो गई हैं, जिस पर रूस ने अपनी सख्त प्रतिक्रिया दी है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने अमेरिकी प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले कुछ महीनों में वाशिंगटन द्वारा उठाए गए कदम क्षेत्र को अस्थिर करने वाले हैं। रूस ने स्पष्ट किया कि वह इस संकट की घड़ी में अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और जहां भी आवश्यकता होगी, वह मदद देने से पीछे नहीं हटेगा।

कूटनीति की अपील: अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन पर रूस की चिंता

मारिया जखारोवा ने अपने संबोधन में सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीति के रास्ते पर लौटने की पुरजोर अपील की। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल के ये हमले अंतरराष्ट्रीय कानूनों की नींव को कमजोर कर रहे हैं। संप्रभु देशों के आंतरिक मामलों में दखल न देना और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान करना वैश्विक व्यवस्था का आधार है, जिसका इस हमले में उल्लंघन हुआ है। रूस का मानना है कि बल प्रयोग या धमकी के बजाय राजनीतिक बातचीत ही एकमात्र समाधान है। जखारोवा ने चेतावनी दी कि इन कदमों के गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जो वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था (NPT) को अपूरणीय क्षति पहुँचा सकते हैं।

परमाणु सुविधाओं पर प्रहार: रूस ने अमेरिका-इजरायल की मंशा पर उठाए सवाल

रूस ने आईएईए (IAEA) की निगरानी वाली परमाणु सुविधाओं पर किए गए हमलों को पूरी तरह से ‘अस्वीकार्य’ करार दिया है। जखारोवा ने तंज कसते हुए कहा कि अमेरिकी-इजरायली गठबंधन द्वारा ईरान को परमाणु हथियारों से रोकने की चिंता महज एक दिखावा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन हमलों के पीछे के असली मकसद कुछ और ही हैं। रूस के अनुसार, परमाणु अप्रसार के नाम पर किए जा रहे ये हमले असल में ईरान की तकनीकी प्रगति को रोकने और क्षेत्र में अपने राजनीतिक हितों को साधने की एक सोची-समझी साजिश है।

सत्ता परिवर्तन की साजिश: “नेतृत्व को खत्म करना है हमलावरों का लक्ष्य”

रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने हमलावरों के इरादों को बेनकाब करते हुए कहा कि इस सैन्य कार्रवाई का वास्तविक उद्देश्य ईरान की संवैधानिक व्यवस्था और उसके नेतृत्व को खत्म करना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल एक ऐसे देश को निशाना बना रहे हैं जो उनके दबाव और शक्ति के आगे झुकने को तैयार नहीं है। जखारोवा ने इस संकट को ‘मानव-निर्मित’ करार देते हुए कहा कि इससे उत्पन्न होने वाली किसी भी अनपेक्षित प्रतिक्रिया या बढ़ती हिंसा की पूरी जिम्मेदारी उन देशों पर होगी जिन्होंने यह हमला शुरू किया है। रूस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इन ‘गैर-जिम्मेदाराना’ कार्रवाइयों का निष्पक्ष मूल्यांकन करने का आग्रह किया है।

शांति बहाली की पेशकश: मध्य पूर्व को अस्थिरता से बचाने की जरूरत

अंत में, रूस ने दोहराया कि वह हमेशा की तरह शांतिपूर्ण समाधान खोजने में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है। मॉस्को का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह हमला पूरे क्षेत्र को एक ऐसी अस्थिरता की ओर धकेल देगा जिससे निकलना नामुमकिन होगा। रूस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह ईरान की संप्रभुता के साथ खड़ा है और किसी भी देश को बलपूर्वक सत्ता परिवर्तन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। वैश्विक शांति के लिए यह जरूरी है कि युद्ध के नगाड़ों को शांत कर बातचीत की मेज पर वापसी की जाए।

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