Russia Plague Case : रूस में लैब वर्कर की मौत से मचा हड़कंप, निगरानी 200 लोग, क्या लौट रहा है प्लेग?

रूस में एक लैब कर्मचारी की मौत के बाद प्लेग को लेकर चिंता बढ़ गई है। घटना के बाद करीब 200 लोगों को निगरानी में रखा गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों की गतिविधियों पर अमेरिका भी नजर बनाए हुए है। कर्मचारी की मौत और संभावित संक्रमण को लेकर जांच जारी है, जिससे मामला गंभीर होता जा रहा है।

Russia Plague Case

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 5, 2026

Russia Plague Case : रूस में एक एंटी-प्लेग लैबोरेटरी वर्कर की मौत से मॉस्को परेशान है। देश के कुछ हिस्सों में न्यूमोनिक प्लेग फैलने का डर है। लैबोरेटरी वर्कर के संपर्क में आए करीब 200 लोगों को पहले ही क्वारंटाइन में भेज दिया गया है। बीमारी को फैलने से रोकने के लिए पांच हॉस्पिटल भी बंद कर दिए गए हैं। यूनाइटेड स्टेट्स भी इस मामले पर कड़ी नज़र रखे हुए है। US स्टेट डिपार्टमेंट ने कहा कि उसे साइबेरिया के इरकुत्स्क इलाके में न्यूमोनिक प्लेग से संदिग्ध मौतों की रिपोर्ट मिली है। US सेंटर्स फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) और दूसरी सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर हालात पर नज़र रखी जा रही है। साथ ही, वॉशिंगटन ने रूस से सही जानकारी जल्दी और ट्रांसपेरेंट तरीके से बताने को कहा है।

महामारी का दस्तक से दुनिया चिंतित

छह साल पहले कोविड महामारी के ज़ख्म अभी भी सुलग रहे हैं। इस बीच, प्लेग के नए फैलने की अटकलों ने न सिर्फ पुतिन के देश, बल्कि पूरी दुनिया को परेशान कर दिया है। इस घटना के केंद्र में 28 साल की लैब वर्कर डारिया शिपिलोवा की मौत है। कई रिपोर्ट्स का दावा है कि वह इरकुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करती थीं। लोकल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 25 सितंबर को लैब में काम करते समय जर्म्स से भरी एक टेस्ट ट्यूब फट गई। कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टेस्ट ट्यूब में न्यूमोनिक प्लेग के जर्म्स थे। कहा जा रहा है कि इसके बाद वर्कर बीमार पड़ गई। हालांकि, रूसी अधिकारियों ने अभी तक साफ तौर पर यह नहीं बताया है कि उसकी मौत का इस घटना से सीधा संबंध है या नहीं।

क्या हुआ लैब वर्कर के साथ?

रिपोर्ट के मुताबिक, शिपिलोवा को 29 सितंबर को निमोनिया के लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में, उसकी शारीरिक हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। उसकी मौत के बाद, यह अंदाज़ा लगाया जाने लगा कि उसे न्यूमोनिक प्लेग हो गया होगा।हालांकि, रूस के हेल्थ और पब्लिक हेल्थ रेगुलेटर रोस्पोट्रेबनादज़ोर ने अभी तक प्लेग की पुष्टि नहीं की है। उनके मुताबिक, महिला को “एक अनजान तरह का निमोनिया” होने का पता चला था। बाद में, और टेस्ट किए गए, लेकिन एजेंसी ने कहा कि उसके काम से जुड़े कोई माइक्रोऑर्गेनिज्म नहीं मिले। रूसी अधिकारियों का यह भी दावा है कि इरकुत्स्क इलाके में पूरी एपिडेमियोलॉजिकल स्थिति स्थिर है।

US नागरिकों की सुरक्षा प्राथमिकता

US स्टेट डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने फॉक्स न्यूज़ को बताया कि वॉशिंगटन को इरकुत्स्क में संदिग्ध न्यूमोनिक प्लेग से मौतों की रिपोर्ट के बारे में पता है। US CDC और दूसरे इंटर-गवर्नमेंटल ऑर्गनाइज़ेशन के साथ मिलकर हालात पर नज़र रख रहा है।US एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक, कई जानकारी अभी भी पक्की नहीं है। इसलिए, रूसी अधिकारियों से रिक्वेस्ट की गई है कि वे जानकारी जल्दी और सही-सही जारी करें। साथ ही, स्टेट डिपार्टमेंट ने यह भी कहा है कि रूस में US नागरिकों की सुरक्षा प्राथमिकता है।इस बीच, व्हाइट हाउस के भी हालात पर नज़र रखने की खबर है। हालांकि, अभी तक US ने रूस के साथ एयर कम्युनिकेशन सस्पेंड नहीं किया है और न ही कोई नया ट्रैवल बैन जारी किया है।

सर्विलांस में 200 लोग

घटना के बाद लोकल एडमिनिस्ट्रेशन ने एहतियाती कदम और कड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक लैब वर्कर के संपर्क में आए करीब 197 लोगों को मेडिकल ऑब्ज़र्वेशन में रखा गया है। कई मेडिकल सेंटर में क्वारंटाइन और सर्विलांस के इंतज़ाम किए गए हैं। क्वारंटाइन की स्थिति के कारण 5 अस्पतालों का कुछ हिस्सा बंद कर दिया गया है। इरकुत्स्क के गवर्नर इगोर कोवझेव ने कहा कि मरे हुए लैब वर्कर के संपर्क में आए पहचाने गए लोगों को मेडिकल निगरानी में रखा गया है। अब तक, उनमें से किसी में भी बीमारी के कोई लक्षण नहीं दिखे हैं और टेस्ट के नतीजे नेगेटिव आने का दावा किया गया है।

कितना खतरनाक है न्यूमोनिक प्लेग?

न्यूमोनिक प्लेग येर्सिनिया पेस्टिस नाम के एक जानलेवा बैक्टीरियल इन्फेक्शन से फैलता है। प्लेग के दूसरे रूपों के उलट, यह इन्फेक्शन सीधे फेफड़ों पर असर डालता है और निमोनिया जैसे लक्षण पैदा कर सकता है। अगर जल्दी इलाज न किया जाए तो यह बीमारी जानलेवा हो सकती है। इन्फेक्टेड व्यक्ति की सांस के ज़रिए जर्म्स फैलने की भी संभावना है। हालांकि, अगर समय पर पता चल जाए तो न्यूमोनिक प्लेग का इलाज किया जा सकता है। US अधिकारियों का कहना है कि इस बीमारी का इलाज आमतौर पर सही एंटीबायोटिक्स से किया जा सकता है और लक्षण दिखते ही इलाज शुरू करना ज़रूरी है।

Read More  :  UP Politics: स्मृति ईरानी को नहीं मिला राज्यसभा टिकट, बीजेपी ने यूपी से इन 8 चेहरों पर खेला दांव