Russia-India Oil Trade: रूसी तेल पर ट्रंप का दावा गलत, भारत के साथ व्यापार जारी रहेगा: लावरोव

ट्रंप ने दावा किया कि पीएम मोदी रूसी तेल नहीं खरीदने पर सहमत हो गए हैं, लेकिन रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। क्या अमेरिका भारत पर दबाव बना रहा है या पर्दे के पीछे कोई नई महाशक्ति की जंग शुरू हो गई है? जानिए असली सच!

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 12, 2026

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Russia-India Oil Trade: रूस और भारत के बीच कच्चे तेल के व्यापार को लेकर जारी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बीच रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का एक बड़ा बयान सामने आया है। लावरोव ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को पूरी तरह से आधारहीन बताया है, जिसमें कहा गया था कि भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। लावरोव ने स्पष्ट किया कि यह केवल ट्रंप की अपनी सोच है और वास्तविकता इससे कोसों दूर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रूस और भारत के द्विपक्षीय व्यापारिक संबंध किसी तीसरे देश के दबाव में आकर खत्म नहीं होने वाले हैं। रूसी विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वाशिंगटन लगातार भारत पर मास्को से दूरी बनाने का दबाव डाल रहा है।

ट्रंप की घोषणा और अमेरिका की शर्तें: क्या है पूरा विवाद?

विवाद की शुरुआत पिछले हफ्ते हुई जब डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ एक नए व्यापारिक समझौते (Trade Deal) के ढांचे की घोषणा की। इस दौरान ट्रंप ने दावा किया कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद करने पर सहमत हो गया है। अमेरिका का तर्क है कि रूस तेल निर्यात से होने वाली कमाई का उपयोग यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में कर रहा है। इसी कारण ट्रंप प्रशासन चाहता है कि भारत जैसे बड़े खरीदार रूस के बजाय अमेरिका या अन्य सहयोगियों से ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करें। हालांकि, लावरोव ने इसे अमेरिका की एकतरफा बयानबाजी करार दिया है, जिसका मकसद केवल रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करना है।

भारत का रुख: ऊर्जा सुरक्षा और संप्रभुता सर्वोपरि

रूसी विदेश मंत्री के बयान के बीच भारत सरकार ने भी अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने आधिकारिक तौर पर कहा कि भारत अपनी राष्ट्रीय जरूरतों और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने सप्लाई चेन की स्थिरता के लिए ऊर्जा स्रोतों में ‘विविधता’ बनाए रखने की बात कही। वहीं, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ शब्दों में कहा कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना सरकार की पहली प्राथमिकता है और रूस के साथ मौजूदा सभी व्यापारिक समझौते सुचारू रूप से जारी हैं।

टैरिफ की राजनीति और ब्रिक्स देशों पर दबाव का आरोप

सर्गेई लावरोव ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह ब्रिक्स (BRICS) देशों, विशेषकर भारत और रूस के बीच बढ़ते सैन्य और व्यापारिक सहयोग को तोड़ने के लिए ‘आर्थिक हथियारों’ का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने जिक्र किया कि किस तरह अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाकर दबाव बनाने की कोशिश की थी। हालांकि बाद में इसे हटा लिया गया, लेकिन अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि यदि रूस से तेल की खरीद जारी रही तो यह प्रतिबंध फिर से लगाए जा सकते हैं। लावरोव का मानना है कि ट्रंप प्रशासन अपनी “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत भारत जैसे रणनीतिक भागीदारों की स्वायत्तता को चुनौती दे रहा है।

भारत-रूस संबंधों की मजबूती और भविष्य की राह

लावरोव का यह कड़ा बयान यह दर्शाता है कि रूस अपनी ऊर्जा कूटनीति में भारत को एक विश्वसनीय साथी के रूप में देखता है। भारत ने भी यह साबित किया है कि वह वैश्विक महाशक्तियों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिका भारत पर नए प्रतिबंध लगाने की हिम्मत करता है या फिर भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को समझते हुए व्यापारिक लचीलापन अपनाता है। फिलहाल के लिए, भारत और रूस के बीच तेल का खेल रुकता हुआ नहीं दिख रहा है।

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