Rupee vs Dollar Today : भारतीय मुद्रा बाजार के लिए आज यानी 27 मार्च 2026 का दिन बेहद निराशाजनक रहा। वैश्विक बाजारों में मची उथल-पुथल और शेयर बाजार में भारी बिकवाली के बीच भारतीय रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में ही रुपया डॉलर के मुकाबले 28 पैसे कमजोर होकर ₹94.24 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर जा गिरा। इससे पहले इसी सप्ताह रुपया ₹93.98 के स्तर पर बंद हुआ था, लेकिन आज की गिरावट ने पुराने सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। निवेशकों के बीच बढ़ती घबराहट और डॉलर की मजबूत होती स्थिति ने रुपये की कमर तोड़ दी है।
युद्ध की मार और रुपये का अवमूल्यन: एक महीने में 3.5% की कमजोरी
रुपये की इस बेतहाशा गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी भीषण संघर्ष है। पिछले महीने जब से ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच युद्ध की शुरुआत हुई है, तब से भारतीय रुपया लगभग 3.5% तक कमजोर हो चुका है। युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल है, जिसका सीधा असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर पड़ रहा है। भारतीय रुपया भी इस वैश्विक दबाव से अछूता नहीं रहा और लगातार टूटता जा रहा है।
ईरान युद्ध का गहराता संकट: कच्चे तेल की आपूर्ति पर बढ़ा खतरा
रुपये के कमजोर होने की पहली और सबसे प्रमुख वजह पश्चिम एशिया में जारी युद्ध है। निवेशकों को इस बात का गहरा डर सता रहा है कि यदि ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष और लंबा खिंचता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति (Global Energy Supply) पूरी तरह बाधित हो सकती है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 80% से अधिक हिस्सा आयात करता है। युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ गया है। जब कच्चे तेल के भुगतान के लिए अधिक डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, तो घरेलू बाजार में रुपये की वैल्यू स्वत: कम हो जाती है।
डॉलर की बढ़ती मांग: निवेशकों के लिए सुरक्षित ठिकाना बना ‘ग्रीनबैक’
दुनिया भर में फैली अस्थिरता और युद्ध के खतरों के बीच वैश्विक निवेशक अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षित संपत्तियों (Safe-haven assets) की ओर भाग रहे हैं। वर्तमान में अमेरिकी डॉलर दुनिया की सबसे सुरक्षित मुद्रा मानी जा रही है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की डिमांड जबरदस्त बढ़ गई है। जब निवेशक अन्य संपत्तियों को बेचकर डॉलर खरीदते हैं, तो डॉलर सूचकांक मजबूत होता है और रुपया जैसी मुद्राएं दबाव में आ जाती हैं। आज की गिरावट में इस ‘डॉलर डिमांड’ ने आग में घी का काम किया है।
शेयर बाजार में कोहराम: विदेशी निवेशकों (FIIs) ने खींचे हाथ
रुपये की गिरावट का सीधा संबंध भारतीय शेयर बाजार से भी जुड़ा है। आज सेंसेक्स और निफ्टी में 1% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। जब शेयर बाजार गिरता है, तो विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालकर उसे सुरक्षित बाजारों या डॉलर में निवेश करने लगते हैं। बाजार से पूंजी का यह बहिर्वाह (Outflow) रुपये की तरलता को प्रभावित करता है और इसकी विनिमय दर (Exchange Rate) को और नीचे धकेलता है। भारतीय बाजार से डॉलर की निकासी ने रुपये को ₹94 के पार पहुँचाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बढ़ती चुनौतियां
रुपये का ₹94.24 के स्तर पर पहुंचना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक खतरे की घंटी है। कमजोर रुपये का मतलब है कि अब विदेश से आने वाली हर चीज महंगी होगी, जिससे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा है। विशेष रूप से पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक्स और खाद्य तेल की कीमतों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। अब सबकी नजरें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पर टिकी हैं कि क्या वह रुपये को संभालने के लिए बाजार में हस्तक्षेप करेगा। यदि युद्ध की स्थिति नहीं सुधरी, तो आने वाले दिनों में रुपया और भी नीचे जा सकता है।
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