Rupee vs Dollar : 94 के रिकॉर्ड निचले स्तर से संभली भारतीय करेंसी, क्या RBI अब करेगा बड़ा हस्तक्षेप?

Rupee vs Dollar Update: क्या भारतीय रुपया 95 के स्तर को भी पार कर जाएगा? मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजरायल जंग ने भारतीय करेंसी को 94 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर धकेल दिया है। हालांकि, आज सुबह रुपये में मामूली रिकवरी दिखी है। क्या RBI का $15 बिलियन का हस्तक्षेप रुपये को डूबने से बचा पाएगा? जानें विशेषज्ञों की राय!

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 24, 2026

Rupee vs Dollar : सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन, मंगलवार 24 मार्च 2026 को भारतीय मुद्रा बाजार में हलचल देखी गई। पिछले सत्र में अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 93.98 पर पहुंचने के बाद, आज रुपये ने सकारात्मक शुरुआत की है। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले थोड़ी मजबूती दिखाते हुए 93.64 के स्तर के आसपास कारोबार करता नजर आया। हालांकि यह सुधार मामूली है, लेकिन लगातार गिरते ग्राफ के बीच इसे एक राहत भरे संकेत के रूप में देखा जा रहा है। निवेशकों की नजर अब वैश्विक घटनाक्रमों पर टिकी है कि क्या यह मजबूती आगे भी बरकरार रह पाएगी।

ट्रंप के बयान का असर: मिडिल ईस्ट तनाव में कमी से मुद्रा बाजार को सहारा

रुपये में आए इस सुधार के पीछे मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ताजा बयान माना जा रहा है। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में चल रहे संघर्ष पर टिप्पणी करते हुए ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर संभावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल टाल दिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकालने की संभावना भी जताई है। इस कूटनीतिक नरमी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की आक्रामकता को थोड़ा कम किया है, जिसका सीधा सकारात्मक असर भारतीय रुपये की वैल्यू पर देखने को मिला है।

वेशकों की रणनीति: बाजार में सतर्कता और वेट एंड वॉचकी स्थिति

भले ही युद्ध टलने की खबरों ने बाजार को थोड़ी ऑक्सीजन दी है, लेकिन निवेशकों का भरोसा अभी पूरी तरह बहाल नहीं हुआ है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता के बादल अभी छंटे नहीं हैं, इसलिए बड़े निवेशक बहुत सावधानी से कदम उठा रहे हैं। गौरतलब है कि सोमवार को रुपये में 0.37% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, जिससे यह 93.95 के पार चला गया था। बाजार जानकारों का कहना है कि जब तक भू-राजनीतिक हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाते, तब तक रुपये में किसी बड़ी और टिकाऊ रिकवरी की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।

RBI की भूमिका: क्या विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचेगा केंद्रीय बैंक?

रुपये की अस्थिरता को देखते हुए अब सबकी निगाहें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पर टिकी हैं। जानकारों का अनुमान है कि यदि रुपया फिर से 94 के मनोवैज्ञानिक स्तर की ओर बढ़ता है, तो आरबीआई बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है। आमतौर पर, ऐसी स्थितियों में केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserve) से डॉलर की बिक्री करता है ताकि रुपये की आपूर्ति और मांग में संतुलन बना रहे और इसमें भारी गिरावट को रोका जा सके। हालांकि, मौजूदा वैश्विक अस्थिरता को देखते हुए आरबीआई भी फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है।

रुपये पर दबाव के मुख्य कारण: कच्चा तेल और वैश्विक अनिश्चितता

विशेषज्ञों ने उन प्रमुख कारकों की पहचान की है जो भारतीय करेंसी को लगातार कमजोर कर रहे हैं। इनमें सबसे ऊपर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल है। मिडिल ईस्ट में जारी विवाद के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होने का डर बना रहता है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ती हैं। चूंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है। इसके अलावा, वैश्विक बाजारों में डॉलर इंडेक्स की मजबूती भी रुपये के लिए चुनौती बनी हुई है।

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