Rupali Chakankar Resignation: नासिक के स्वयंभू बाबा अशोक खरात के सेक्स स्कैंडल मामले में फंसीं रुपाली चाकणकर की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद से हटने के बाद अब उन्होंने पार्टी के भीतर भी अपने सांगठनिक पद को त्याग दिया है।
बाबा अशोक खरात मामले में चौतरफा घिरी रुपाली
बताते चले कि, अशोक खरात को अपना आध्यात्मिक गुरु मानने वाली रुपाली चाकणकर पिछले कई दिनों से विपक्ष और जनता के भारी दबाव में थीं। शुक्रवार को उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की महिला प्रदेश अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना त्यागपत्र पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्य की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को भेज दिया है। इस्तीफे में चाकणकर ने स्पष्ट किया कि वह इस पूरे मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए स्वेच्छा से पद छोड़ रही हैं।
‘कुकर्मों में मेरी कोई सांठगांठ नहीं’
इस्तीफा देने के बाद मीडिया से बात करते हुए रुपाली चाकणकर ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अशोक खरात के साथ उनके संबंधों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि खरात के वित्तीय लेन-देन या उसके द्वारा किए गए किसी भी अनैतिक कृत्य में उनकी कोई भूमिका नहीं है। चाकणकर ने दुख जताते हुए कहा कि मीडिया में बिना किसी पुख्ता सबूत के उनके खिलाफ निराधार और झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
सीएम देवेंद्र फडणवीस का सख्त रुख
इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब महायुति सरकार की छवि पर सवाल उठने लगे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए सख्त तेवर दिखाए। बताया जा रहा है कि सरकार की हो रही फजीहत से नाराज मुख्यमंत्री ने एनसीपी नेतृत्व को स्पष्ट संदेश दे दिया था कि वे इस बदनामी को बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसी कड़े रुख के कारण पहले रुपाली को राज्य महिला आयोग के संवैधानिक पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
मुख्यमंत्री से मुलाकात और सफाई की कोशिश
इस्तीफा देने से पहले रुपाली चाकणकर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर अपना पक्ष रखने और सफाई देने की कोशिश की थी। हालांकि, सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने उनकी दलीलें सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। सीएम ने यह स्पष्ट कर दिया कि जांच प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप या पद का प्रभाव आड़े नहीं आना चाहिए। मुख्यमंत्री के इसी कड़े रुख के बाद अंततः रुपाली को एक के बाद एक अपने दोनों महत्वपूर्ण पदों को छोड़ना पड़ा।









