PM Modi Controversy: सीजेपी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने हाल ही में रुचिका सिंह द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई अभद्र टिप्पणी और विवादित बयान को लेकर उनका खुलकर बचाव किया है। सौरव का कहना है कि यदि प्रदर्शन के दौरान किसी ने गुस्से में अपशब्द या गाली का इस्तेमाल किया भी है, तो आप केवल उसकी मौखिक निंदा कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए पूरी सरकारी क्रिमिनल मशीनरी का इस्तेमाल करना और पुलिस बल के जरिए उसे टार्गेट करना बिल्कुल भी जायज और सही नहीं है।
गाली देने को क्रिमिनल ऑफेंस बताने पर सवाल
सौरव दास ने कड़ा सवाल उठाते हुए पूछा कि इस देश में मौखिक रूप से गाली देना आखिरकार कब से एक बड़ा क्रिमिनल ऑफेंस (अपराध) बन गया है, जबकि देश में लोग आम जिंदगी में चलते-फिरते अक्सर ऐसी भाषा का प्रयोग करते हैं। उन्होंने देश के लोकसभा सांसदों का हवाला देते हुए कहा कि संसद के भीतर मौजूद जितने भी सदस्य हैं, उनमें से लगभग 50 प्रतिशत सांसदों पर गंभीर आपराधिक मामलों के चार्ज लगे हुए हैं, लेकिन सरकार या तंत्र उन विषयों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं कर रहा है।
छात्रों को परेशान न करने की अपील
अपने बयान को आगे बढ़ाते हुए CJP प्रवक्ता ने केंद्र सरकार और पुलिस प्रशासन से कड़ी अपील की है कि वे छात्र-छात्राओं को इस तरह से परेशान करना तुरंत बंद कर दें। उन्होंने विशेष तौर पर कहा कि इस पूरे विवाद से जुड़ी उस लड़की (रुचिका सिंह) को भी अब पुलिसिया कार्रवाई से अकेला छोड़ देना चाहिए। उनका मानना है कि इस प्रकार के राजनीतिक और सामाजिक मामलों में पुलिस मशीनरी का खुला दुरुपयोग करना किसी भी सूरत में स्वीकार करने योग्य नहीं है।
रुचिका सिंह की 23 जुलाई की जंतर-मंतर टिप्पणी
उल्लेखनीय है कि रुचिका सिंह ने बीते 23 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री पद और कार्यालय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं, जिसके संबंध में बुधवार को एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता का गंभीर आरोप है कि उनकी इन अपमानजनक टिप्पणियों से न केवल प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की गरिमा को भारी ठेस पहुंची है, बल्कि इससे समाज में तनाव और सार्वजनिक अशांति फैलने का भी बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
नोएडा एक्सप्रेसवे पुलिस स्टेशन में जीरो FIR दर्ज
इस पूरे विवादित मामले के तूल पकड़ने के बाद नोएडा के एक्सप्रेसवे पुलिस स्टेशन में एक ‘जीरो FIR’ (ऐसी प्राथमिकी जो अपराध स्थल की सीमा से परे किसी भी थाने में दर्ज की जा सकती है) दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने यह एफआईआर शांति भंग करने के लिए उकसाने, सार्वजनिक अशांति फैलाने वाले भड़काऊ बयान देने और मानहानि से जुड़े विभिन्न गंभीर आरोपों के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 353(1) और 356(1) के अंतर्गत दर्ज की है, जिसकी अब कानूनी जांच की जा रही है।










