Rohit Pawar: शिंदे-पवार मुलाकात के बाद मची सियासी खलबली, रोहित पवार ने बताया मुलाकात का असली कारण

शरद पवार और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की हालिया मुलाकात के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में मची हलचल के बीच, रोहित पवार ने स्पष्टीकरण देते हुए इसे पूरी तरह से अनौपचारिक बताया है।

Rohit Pawar

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 10, 2026

Rohit Pawar: महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की हालिया मुलाकात ने एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। इस मुलाकात के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि क्या शरद पवार का गुट एनडीए (NDA) के करीब जा रहा है? इन तमाम अटकलों के बीच, शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने स्पष्ट किया है कि इस मुलाकात के पीछे कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं था।

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मुलाकात के पीछे की हकीकत

रोहित पवार ने कहा कि शरद पवार राजनीति से ऊपर उठकर सोचने वाले नेता हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पवार साहब को चलने-फिरने में कुछ दिक्कतें हैं, जिसके चलते उन्होंने उस दफ्तर का उपयोग किया जो उस वक्त सबसे नजदीक था। उन्होंने कहा, “पवार साहब जब वहां पहुंचे तो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उनका सत्कार किया। यह उनके बड़प्पन का परिचायक है। हम इसे राजनीति की पुरानी परंपरा के नजरिए से देख रहे हैं, न कि किसी राजनीतिक गठबंधन की आहट के तौर पर।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे की पार्टी के नेता इसे अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।

बीजेपी पर हमला और सांसदों की नाराजगी

रोहित पवार ने बीजेपी पर सीधा निशाना साधते हुए पार्टी के भीतर चल रही हलचल और सांसदों की कथित नाराजगी पर अपनी बात रखी। जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी पार्टी के सांसद एनडीए की ओर झुक रहे हैं, तो उन्होंने कहा, “सांसद विकास कार्यों को लेकर चिंतित हो सकते हैं, लेकिन वे बीजेपी का समर्थन करने के बारे में सोच भी नहीं सकते।” उन्होंने अयोध्या के घटनाक्रम का हवाला देते हुए कहा कि अब हर मंदिर में बीजेपी की नीतियों के खिलाफ चर्चा हो रही है। उन्होंने दावा किया कि जनता और उनके विधायक बीजेपी की विचारधारा से दूर जा रहे हैं, ऐसे में शरद पवार गुट के सांसदों का बीजेपी के साथ जाने का सवाल ही नहीं उठता।

सावरकर को भारत रत्न

वीर सावरकर को भारत रत्न देने के मुद्दे पर रोहित पवार ने एक संतुलित लेकिन तार्किक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जब यह प्रस्ताव सदन में आएगा, तब पार्टी उस पर विचार करेगी। हालांकि, उन्होंने एक महत्वपूर्ण शर्त रखी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि सावरकर द्वारा लिखी गई पुस्तकों पर सदन में विस्तार से चर्चा होनी चाहिए।

रोहित पवार ने कहा, “सावरकर जी के विचार केवल एकतरफा नहीं देखे जा सकते। उनके गाय, धर्म, देश और महिलाओं के बारे में क्या मत थे, यह सब जनता के सामने आना चाहिए। सावरकर जी के दो पहलू हैं—एक सकारात्मक और एक नकारात्मक। जब तक इन दोनों पहलुओं पर सदन में खुली चर्चा नहीं होगी, तब तक लोगों को उनके विचारों की असलियत पता नहीं चलेगी।”

रोहित पवार का यह बयान दर्शाता है कि शरद पवार का गुट फिलहाल विपक्षी गठबंधन के साथ मजबूती से खड़ा है और किसी भी प्रकार के राजनीतिक विलय या गठबंधन की चर्चाओं को सिरे से खारिज कर रहा है। आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में ये बयान क्या मोड़ लाते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।

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