Ritu Jaiswal joins BJP : बिहार में सियासी उलटफेर, आरजेडी की पूर्व नेत्री रितु जायसवाल भाजपा में शामिल

बिहार की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब आरजेडी की फायरब्रांड नेता और पूर्व मुखिया रितु जायसवाल ने अचानक पाला बदल लिया। लालू परिवार की करीबी मानी जाने वाली रितु ने भाजपा का दामन थामकर सबको चौंका दिया है। आखिर क्या थी वो अनबन जिसने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर किया?

Ritu Jaiswal joins BJP

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 26, 2026

Ritu Jaiswal joins BJP : बिहार विधानसभा चुनाव के संपन्न होने के बाद राज्य की राजनीतिक बिसात पर मोहरों की चाल तेज हो गई है। इसी कड़ी में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है, जब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की कद्दावर नेता रहीं और पूर्व महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष रितु जायसवाल आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गई हैं। पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक मिलन समारोह के दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई और माला पहनाकर उनका स्वागत किया। रितु जायसवाल का भाजपा में जाना आरजेडी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि वे पार्टी का एक प्रखर चेहरा रही हैं।

मुखिया दीदीका सफर: आरजेडी के मुख्य चेहरे से बगावत तक की कहानी

रितु जायसवाल को बिहार की राजनीति में मुखिया दीदी के नाम से जाना जाता है। उन्होंने जमीनी स्तर पर पंचायत राजनीति से अपने करियर की शुरुआत की थी और बहुत कम समय में अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। आरजेडी में रहते हुए उन्होंने महिला सशक्तिकरण और सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात रखी। पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें शिवहर लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार भी बनाया था, जहाँ उन्होंने कड़ी टक्कर दी थी। हालांकि, पिछले कुछ समय से उनके और पार्टी नेतृत्व, विशेषकर तेजस्वी यादव के बीच दूरियां बढ़ने लगी थीं, जिसका परिणाम अंततः दल-बदल के रूप में सामने आया है।

टिकट कटने से बढ़ा विवाद: परिहार विधानसभा सीट बनी कलह की जड़

रितु जायसवाल की नाराजगी की असल नींव 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान पड़ी। रितु सीतामढ़ी जिले की परिहार विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की प्रबल दावेदार थीं और लंबे समय से वहां तैयारी कर रही थीं। लेकिन जब पार्टी ने उन्हें टिकट देने से इनकार कर दिया, तो उनका धैर्य जवाब दे गया। टिकट न मिलने को उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य के साथ खिलवाड़ माना और पार्टी से बगावत का झंडा बुलंद कर दिया। रितु ने नेतृत्व के फैसले को चुनौती देते हुए परिहार से निर्दलीय चुनाव लड़ा। हालांकि, इस त्रिकोणीय संघर्ष में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा, लेकिन इस कदम ने आरजेडी के भीतर खलबली मचा दी थी।

अनुशासनहीनता पर कार्रवाई: आरजेडी से 6 साल के लिए किया गया निष्कासित

निर्दलीय चुनाव लड़ने के रितु के फैसले को आरजेडी नेतृत्व ने अनुशासनहीनता के रूप में देखा। पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ जाने और अधिकृत उम्मीदवार के विरोध में खड़े होने के कारण राजद आलाकमान ने उन पर सख्त कार्रवाई की। उन्हें तुरंत प्रभाव से 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। इस निष्कासन के बाद रितु जायसवाल के पास अपने राजनीतिक वजूद को बचाने के लिए एक नए मंच की तलाश थी। पिछले कुछ हफ्तों से उनके भाजपा के शीर्ष नेताओं के संपर्क में होने की खबरें आ रही थीं, जिस पर अब आधिकारिक मुहर लग गई है।

प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों में भरोसा: रितु ने तेजस्वी पर साधा निशाना

भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद रितु जायसवाल के सुर पूरी तरह बदले हुए नजर आए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की जमकर सराहना की और कहा कि “भाजपा वह दल है जो राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखता है।” तेजस्वी यादव पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की योजनाएं समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंच रही हैं, जिससे वे बेहद प्रभावित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी व्यक्तिगत लालच में नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की जनहितकारी नीतियों और विकास कार्यों से खुश होकर भाजपा में शामिल हुई हैं। अब देखना यह होगा कि रितु के आने से भाजपा को सीमावर्ती इलाकों में कितना चुनावी लाभ मिलता है।

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