दवा कीमतों में बढ़ोतरी से झारखंड में मरीजों की परेशानी बढ़ी

मेदिनीनगर (पलामू)  पलामू समेत राज्य में जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों पर ईरान-अमेरिका युद्ध और पेट्रोलियम उत्पादों के दाम बढ़ने का दोहरा असर देखने को मिल रहा है। इसके चलते जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। मधुमेह, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और थायरायड जैसी बीमारियों की नियमित दवाएं महंगी होने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। पहले जहां मरीज एक महीने की दवाएं एक साथ खरीद लेते थे, अब वे केवल दो सप्ताह की दवाएं ही खरीद पा रहे हैं। कीमतों में बढ़ोतरी का असर दवा कारोबारियों के मुनाफे पर

Wrriten By :

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Published On :

जून 14, 2026

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मेदिनीनगर (पलामू)
 पलामू समेत राज्य में जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों पर ईरान-अमेरिका युद्ध और पेट्रोलियम उत्पादों के दाम बढ़ने का दोहरा असर देखने को मिल रहा है। इसके चलते जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है।

मधुमेह, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और थायरायड जैसी बीमारियों की नियमित दवाएं महंगी होने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। पहले जहां मरीज एक महीने की दवाएं एक साथ खरीद लेते थे, अब वे केवल दो सप्ताह की दवाएं ही खरीद पा रहे हैं। कीमतों में बढ़ोतरी का असर दवा कारोबारियों के मुनाफे पर भी पड़ा है।

जीएसटी में कटौती का लाभ महंगाई में बेअसर
केंद्र सरकार द्वारा दवाओं पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किए जाने के बावजूद दवाओं के एमआरपी में वृद्धि के कारण इसका लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पा रहा है। 23 दिसंबर 2025 से लागू इस कटौती के बाद भी बढ़ी हुई एमआरपी के चलते मरीजों को राहत नहीं मिल रही है। वहीं पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत बढ़ने से परिवहन लागत बढ़ी है, जिससे दवा कारोबारियों के मार्जिन पर भी असर पड़ा है।

प्लेटिनम महंगा होने से कैंसर की दवाओं पर असर
कैंसर के उपचार में उपयोग होने वाले प्लेटिनम की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है, जिससे सिस्प्लैटिन, कार्बोप्लाटिन और ऑक्सालिप्लाटिन जैसी दवाओं की उपलब्धता और कीमत दोनों प्रभावित हुई हैं। सितंबर 2025 में प्लेटिनम की कीमत 3869 रुपये प्रति ग्राम थी, जो अब बढ़कर लगभग 8000 रुपये प्रति ग्राम हो गई है।

इसके चलते दवा कंपनियां बढ़ी हुई लागत पर दवाएं उपलब्ध कराने में असमर्थता जता रही हैं। इन दवाओं की कीमत 100 रुपये से लेकर 5000 रुपये प्रति डोज तक है। साथ ही बुखार और सामान्य बीमारियों में उपयोग होने वाली पैरासिटामोल जैसी दवाओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

दवा निर्माण के कच्चे माल के साथ-साथ पैकिंग मैटेरियल जैसे प्लास्टिक दाना, बोतल व अन्य सामग्री के दाम बढ़ने से भी दवाओं की कीमतों पर असर पड़ा है।

-रमेश कुमार शुक्ला, प्रदेश महासचिव, केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट आर्गनाइजेशन
उत्पादन और लॉजिस्टिक लागत में लगातार बढ़ोतरी फार्मा उद्योग के लिए बड़ी चुनौती बन रही है। ऐसे में दवाओं की कीमत नियंत्रण और उनकी नियमित उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

-मृत्युंजय शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट आर्गनाइजेशन

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