5वीं-8वीं के परीक्षा केंद्रों को 5 किमी दूर भेजने से बच्चों और अभिभावकों को बढ़ी मुश्किलें

भोपाल  प्रदेश में 5वीं और 8वीं की बोर्ड पैटर्न परीक्षाएं 20 फरवरी से शुरू होने जा रही हैं। इस परीक्षा में करीब 25 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे, जिनके लिए प्रदेश भर में लगभग 12 हजार से अधिक परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। ये परीक्षा केंद्र मूल विद्यालय से पांच किलोमीटर दूर के विद्यालयों में बनाए जाने से परीक्षार्थी और अभिभावकों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। परीक्षा 20 फरवरी से 28 फरवरी तक आयोजित की जाएगी और इसके लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। राज्य शिक्षा केंद्र के नियमों के अनुसार छोटे विद्यार्थियों को ध्यान में रखते हुए

Wrriten By :

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Published On :

फ़रवरी 7, 2026

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भोपाल
 प्रदेश में 5वीं और 8वीं की बोर्ड पैटर्न परीक्षाएं 20 फरवरी से शुरू होने जा रही हैं। इस परीक्षा में करीब 25 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे, जिनके लिए प्रदेश भर में लगभग 12 हजार से अधिक परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। ये परीक्षा केंद्र मूल विद्यालय से पांच किलोमीटर दूर के विद्यालयों में बनाए जाने से परीक्षार्थी और अभिभावकों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है।

परीक्षा 20 फरवरी से 28 फरवरी तक आयोजित की जाएगी और इसके लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। राज्य शिक्षा केंद्र के नियमों के अनुसार छोटे विद्यार्थियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र स्कूल से कम दूरी पर बनाए जाने चाहिए, ताकि उन्हें आने-जाने में परेशानी न हो। राज्य शिक्षा केंद्र ने एक से तीन किमी के अंदर तक केंद्र बनाने के निर्देश दिए थे, लेकिन कई जगहों पर केंद्र चार से पांच किलोमीटर दूरी पर बनाए जाने की शिकायत सामने आ रही हैं।

5वीं व 8वीं की यह परीक्षा माध्यमिक शिक्षा मंडल के पैटर्न पर आयोजित की जा रही है। इसमें सरकारी, निजी स्कूलों तथा मदरसों के विद्यार्थी शामिल होंगे।

ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक परेशानी

ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या और ज्यादा गंभीर हो सकती है, क्योंकि वहां परिवहन की सुविधा सीमित रहती है। छोटे बच्चों को समय पर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए अधिक समय और संसाधनों की जरूरत पड़ेगी। अभिभावकों का कहना है कि अधिक दूरी होने से बच्चों की सुरक्षा और समय पर पहुंचने की चिंता बढ़ जाती है।

निजी स्कूलों को अधिक बनाए गए केंद्र

भोपाल जिले में 201 केंद्रों पर करीब 78 हजार बच्चे शामिल होंगे। इसमें पुराने शहर में जनशिक्षा केंद्र प्रभारी एवं जनशिक्षक के प्रस्ताव को नजरअंदाज कर विकासखंड स्रोत समन्वयकों ने सरकारी के बदले निजी स्कूलों को केंद्र बना दिया गया है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि केंद्र विद्यार्थियों की संख्या और उपलब्ध सुविधाओं को ध्यान में रखकर तय किए जाते हैं।

 

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