अभिभावकों को राहत: पंजाब में प्राइवेट स्कूलों की फीस वृद्धि पर लगा 5 फीसदी का कैप

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों की फीस वृद्धि को लेकर बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने घोषणा की है कि अब राज्य के निजी शिक्षण संस्थान एक वर्ष में 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। सरकार इस फैसले को कानूनी रूप देने के लिए जल्द ही अध्यादेश लाने जा रही है, जिसे आगामी विधानसभा सत्र में विधेयक के रूप में पेश कर कानून बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से अभिभावक निजी स्कूलों द्वारा लगातार बढ़ाई जा रही फीस को लेकर चिंता जता रहे थे। कई परिवारों पर बढ़ती शैक्षणिक

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Published On :

जून 3, 2026

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चंडीगढ़.

पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों की फीस वृद्धि को लेकर बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने घोषणा की है कि अब राज्य के निजी शिक्षण संस्थान एक वर्ष में 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। सरकार इस फैसले को कानूनी रूप देने के लिए जल्द ही अध्यादेश लाने जा रही है, जिसे आगामी विधानसभा सत्र में विधेयक के रूप में पेश कर कानून बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से अभिभावक निजी स्कूलों द्वारा लगातार बढ़ाई जा रही फीस को लेकर चिंता जता रहे थे। कई परिवारों पर बढ़ती शैक्षणिक लागत का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा था। सरकार ने इन शिकायतों और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके और फीस वृद्धि पर नियंत्रण रखा जा सके।

अधिक फीस करनी होगी वापस
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने स्पष्ट किया कि पांच प्रतिशत की यह सीमा केवल ट्यूशन फीस तक सीमित नहीं होगी, बल्कि स्कूलों द्वारा विद्यार्थियों से वसूली जाने वाली अन्य अनिवार्य फीस भी इसमें शामिल मानी जाएगी। यानी स्कूल किसी अन्य मद के नाम पर अतिरिक्त शुल्क लगाकर नियमों को दरकिनार नहीं कर सकेंगे। सरकार ने यह भी तय किया है कि जिन निजी स्कूलों ने पिछले तीन वर्षों के दौरान 15 फीसदी से अधिक फीस बढ़ाई है, उन्हें अतिरिक्त वसूली गई राशि अभिभावकों को वापस करनी होगी। सरकार इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अभिभावकों के हितों की रक्षा हो।

अमृतसर की घटना पर जताया दुख
मुख्यमंत्री ने इस फैसले को हाल ही में अमृतसर में सामने आए एक दुखद मामले से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि एक होनहार छात्रा द्वारा कथित रूप से स्कूल में प्रताड़ना से परेशान होकर आत्महत्या किए जाने की घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया था। इसके बाद सरकार ने निजी शिक्षण संस्थानों की कार्यप्रणाली और फीस संरचना की समीक्षा शुरू की। मान ने कहा कि शिक्षा किसी भी परिवार के लिए सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है और इसे व्यवसाय का माध्यम नहीं बनने दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार विद्यार्थियों और अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है तथा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

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