कर्मचारियों के लिए राहत की खबर, हरियाणा HC ने 3 श्रेणियों को पुरानी पेंशन का हक दिया

चंडीगढ़. हरियाणा के कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना को लेकर चल रहे लंबे विवाद में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। 46 याचिकाओं का निपटारा करते हुए कोर्ट ने मामलों को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर निर्णय दिया। इनमें एक श्रेणी के कर्मचारियों को राहत नहीं मिली, जबकि तीन अन्य श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना का रास्ता साफ कर दिया गया है। खास तौर पर नियमित होने से पहले की लंबी सेवा और पुरानी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है। पहली श्रेणी में वे कर्मचारी शामिल थे, जिनकी नियुक्ति

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Published On :

सितम्बर 2, 2026

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चंडीगढ़.

हरियाणा के कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना को लेकर चल रहे लंबे विवाद में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। 46 याचिकाओं का निपटारा करते हुए कोर्ट ने मामलों को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर निर्णय दिया। इनमें एक श्रेणी के कर्मचारियों को राहत नहीं मिली, जबकि तीन अन्य श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना का रास्ता साफ कर दिया गया है।

खास तौर पर नियमित होने से पहले की लंबी सेवा और पुरानी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है। पहली श्रेणी में वे कर्मचारी शामिल थे, जिनकी नियुक्ति एक जनवरी 2006 के बाद और 18 अगस्त 2008 से पहले हुई थी। इन कर्मचारियों ने 28 अक्टूबर 2005 की कटआफ तारीख को बदलकर 18 अगस्त 2008 करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि हरियाणा की नई पेंशन योजना 18 अगस्त 2008 को अधिसूचित हुई थी, इसलिए इसी तारीख को आधार बनाया जाना चाहिए।

हाई कोर्ट ने यह मांग खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार अपनी कर्मचारियों से संबंधित पेंशन नीति बनाते समय केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित कटआफ तारीख को अपनाने के लिए बाध्य नहीं है। इसलिए 28 अक्टूबर 2005 की कटआफ तारीख में बदलाव नहीं किया जा सकता। दूसरी श्रेणी के कर्मचारियों को महत्वपूर्ण राहत मिली है। इसमें वे कर्मचारी शामिल हैं, जिन्होंने एक जनवरी 2006 से पहले पार्ट टाइम, एडहाक, अस्थायी या अनुबंध के आधार पर काम शुरू किया था और बाद में नियमित हुए। कोर्ट ने कहा कि राज्य एक आदर्श नियोक्ता है। लंबे समय तक कर्मचारी से सेवा लेने के बाद उसकी पूर्व सेवा को पूरी तरह नजरअंदाज कर उसे पेंशन जैसे लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। लगातार की गई ऐसी सेवा को केवल पार्ट टाइम या अस्थायी सेवा बताकर बाहर नहीं किया जा सकता। लिहाजा नियमितीकरण से पहले की पात्र निरंतर सेवा को पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा में शामिल किया जाएगा।

पुराने विज्ञापन पर हुई भर्ती में भी ओपीएस का लाभ
तीसरी श्रेणी में वे कर्मचारी हैं, जिनके लिए भर्ती का विज्ञापन 28 अक्टूबर 2005 से पहले जारी हो चुका था, लेकिन नियुक्ति एक जनवरी 2006 के बाद हुई। कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया शुरू होने की तारीख को अहम माना। यदि बाद में भर्ती प्रक्रिया में कोई बदलाव हुआ या नया विज्ञापन जारी किया गया, लेकिन वह वास्तव में पहले शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया की निरंतरता था, तो उसे नई भर्ती नहीं माना जाएगा। ऐसे मामलों में केवल नियुक्ति बाद में होने के आधार पर पुरानी पेंशन का लाभ नहीं रोका जा सकता।

अनुकंपा नियुक्तियों में भी रास्ता साफ
चौथी श्रेणी में अनुकंपा और एक्स-ग्रेशिया आधार पर नियुक्त कर्मचारी शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि कर्मचारी की मृत्यु और अनुकंपा नियुक्ति के लिए दावा या आवेदन 28 अक्टूबर 2005 से पहले शुरू हो चुका था, तो बाद में हुई औपचारिक नियुक्ति के कारण उसे पुरानी पेंशन योजना से वंचित नहीं किया जा सकता। ऐसे पात्र कर्मचारियों को आठ मई 2023 के कार्यालय ज्ञापन के तहत ओपीएस का लाभ देने का रास्ता साफ किया गया है।

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