Rupee vs Dollar : RBI के एक्शन से संभला रुपया, डॉलर के खिलाफ 14 पैसे की मजबूती, सट्टेबाजों पर नकेल से पलटी बाजी

रुपये की ऐतिहासिक वापसी! लगातार गिरावट के बाद रिजर्व बैंक ने ऐसे कड़े नियम लागू किए कि डॉलर के खरीदार पीछे हट गए। 14 पैसे की इस मजबूती के पीछे बैंकों की पोजीशन कैपिंग का बड़ा हाथ है। क्या यह तेजी बरकरार रहेगी या वैश्विक तनाव फिर रुपये को गिराएगा?

Rupee vs Dollar

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 6, 2026

Rupee vs Dollar :  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी को नियंत्रित करने और रुपए की विनिमय दर में भारी उतार-चढ़ाव को थामने के लिए उठाए गए कदमों का सकारात्मक असर सोमवार को देखने को मिला। आरबीआई की नई पहलों के चलते अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 14 पैसे की बढ़त के साथ 93.04 (अस्थायी) के स्तर पर बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक द्वारा बैंकों की ‘नेट ओपन पोज़िशन्स’ की सीमा को 100 मिलियन डॉलर तय करने के फैसले से बाजार में स्थिरता आई है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और विदेशी पूंजी की लगातार निकासी अब भी रुपए के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

बाजार का उतार-चढ़ाव: इंट्राडे ट्रेड में 92.79 के स्तर तक पहुंचा रुपया

सोमवार को कारोबारी सत्र की शुरुआत में रुपया डॉलर के मुकाबले 93.13 पर खुला था। कारोबार के दौरान आरबीआई के हस्तक्षेप और सकारात्मक धारणा के चलते इसमें तेजी देखी गई और एक समय यह 92.79 के उच्च स्तर तक जा पहुंचा। अंततः यह 93.04 पर स्थिर हुआ। इससे पहले पिछले गुरुवार को भी रुपए ने जबरदस्त वापसी करते हुए 152 पैसे की ऐतिहासिक बढ़त दर्ज की थी। हालांकि, गुड फ्राइडे के अवकाश के कारण शुक्रवार को बाजार बंद रहे थे। वर्तमान में रुपए की चाल काफी हद तक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी हुई है, जो आयातकों के लिए चिंता का विषय है।

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव: ट्रंप की डेडलाइन और होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट

रुपए की मजबूती के बीच वैश्विक मोर्चे पर भारी अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने विदेशी मुद्रा बाजार को सतर्क कर दिया है। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए मंगलवार तक की समय सीमा दी है और चेतावनी दी है कि बात न मानने पर ईरान के बिजली बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। इस तनाव के बावजूद, डॉलर इंडेक्स में 0.15 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई, जिससे रुपया को संभलने में मदद मिली। वहीं, ब्रेंट क्रूड वायदा 1.61 प्रतिशत गिरकर 107.29 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

घरेलू शेयर बाजार में उछाल: सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार तेजी

जहाँ एक ओर करेंसी मार्केट में सुधार दिखा, वहीं दूसरी ओर घरेलू इक्विटी बाजार ने भी निवेशकों को गदगद कर दिया। सोमवार को सेंसेक्स 787.30 अंकों की भारी छलांग लगाकर 74,106.85 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी में भी 255.15 अंकों की बढ़त रही और यह 22,968.25 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में इस तेजी के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का रुख नकारात्मक बना हुआ है। एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कारोबारी सत्र में विदेशी निवेशकों ने करीब 9,931.13 करोड़ रुपए मूल्य के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की, जो बाजार की लिक्विडिटी के लिए एक चिंताजनक संकेत है।

विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट: 688 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंचा रिजर्व

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। 27 मार्च को समाप्त सप्ताह के दौरान देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 10.288 अरब डॉलर घटकर 688.058 अरब डॉलर रह गया। यह लगातार दूसरा हफ्ता है जब भंडार में बड़ी कमी आई है; इससे पिछले सप्ताह में भी इसमें 11.413 अरब डॉलर की गिरावट देखी गई थी। भंडार में यह कमी मुख्य रूप से वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच रुपए को सहारा देने के लिए आरबीआई द्वारा डॉलर की बिक्री किए जाने के कारण हो सकती है।

सर्विस सेक्टर में सुस्ती: 14 महीनों के निचले स्तर पर पहुंची पीएमआई

आर्थिक मोर्चे पर एक और महत्वपूर्ण खबर सर्विस सेक्टर से जुड़ी है। मार्च महीने में भारत के सेवा क्षेत्र (Service Sector) की विकास दर पिछले 14 महीनों में सबसे धीमी रही है। HSBC इंडिया सर्विसेज पीएमआई बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स फरवरी के 58.1 से गिरकर मार्च में 57.5 पर आ गया। यह गिरावट मुख्य रूप से नए व्यापारिक ऑर्डर्स में आई सुस्ती को दर्शाती है। हालांकि, इंडेक्स का 50 से ऊपर होना विस्तार का संकेत है, लेकिन विकास की गति का कम होना घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए एक सतर्क करने वाला संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक मांग और मुद्रास्फीति की स्थिति इस सेक्टर की दिशा तय करेगी।

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